दुर्दांत हत्यारे खिलजी की कब्र है पुरातत्व से संरक्षित लेकिन चन्द्रशेखर आज़ाद दाह स्थली पर सोते हैं कुत्ते. भारत वालों ध्यान दो

इसे भारत का दुर्भाग्य न कहा जाय तो और क्या कहा जाय ? एक वीर बलिदानी जिसने जीवन का एक भी पल अपने लिए नहीं जिया और देश के लिए मात्र अल्पायु में ही संसार की उस समय की सबसे  बड़ी सैन्य सत्ता ब्रिटिश से लड़ते हुए अमरता को प्राप्त हो गया उसकी दाह स्थली पर आज कुत्ते सोते हुए और जुआ खेलते जुआरी मिल जायेगें लेकिन वो आक्रान्ता जिसने नारियों का बलात्कार किया , हिन्दुओं का सर काटा और तमाम पवित्र आत्माओं को जौहर के लिए मजबूर कर दिया उसकी कब्र पुरातत्व द्वारा संरक्षित है .. क्या ये पीड़ा उन अमर बलिदानियों को नहीं होती होगी ?

पहले बात करते हैं भारत के कलंक कहे जा सकने वाले अलाउद्दीन खिलजी की . विदेश से आया ये लुटेरा आज भी दिल्ली के महरौली इलाके में कुतुबमीनार के पास पुरातत्व द्वारा संरक्षित कब्र में आराम फरमा रहा है जिसकी कब्र को भारत के पहले के तथाकथित धर्म निरपेक्ष और आज़ादी के ठेकेदार शासकों ने संरक्षित कर के रखा है . उस स्थान की साफ़ सफाई का पूरा ध्यान रखा जाता है और सुरक्षा का भी पूरा प्रबंध है जिस से भारत की धर्म निरपेक्षता खिलजी की कब्र में सलामत रहे . नकली वामपंथी और झोलाछाप इतिहासकार पुरष्कार भी लौटाना शुरू कर देंगे अगर खिलजी का उचित सम्मान नहीं रखा गया तो ..

और चन्द्रशेखर आज़ाद जो यकीनन संसार के सबसे महानतम क्रांतिकारी थे . जो बल बुद्धि के ऐसे जीवंत रूप थे जिन्होंने भारत के लिए अपने जीवन की पहली और अंतिम सांस ली . उस क्रांतिवीर की दाहस्थली इलाहाबाद के चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क से लगभग 5 किलोमीटर दूर तेलियरगंज के रसूलाबाद श्मशान घाट पर है . ये स्थान उत्तर प्रदेश की राष्ट्रवादी सरकार के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का संसदीय इलाका भी माना जाता है लेकिन उस स्थान पर जहाँ संसार का सबसे महान क्रांतिवीर का अंतिम संस्कार हुआ था वहाँ एक टूटी फूटी मीनार जो किसी ने अपने खुद के पैसे से बनवाई थी , बेहद जर्जर हालत में पड़ी है . उस स्थान पर आज भी जुआ होता है और उस वीर की दाह स्थली पर कुत्ते और अन्य जानवर सोते हैं .. आज तक वहां कोई तथाकथित राजनेता झाँकने भी नहीं गया… 

गत वर्ष सुदर्शन न्यूज़ ने दिल्ली के एक राष्ट्रवादी संगठन सुदर्शन वाहिनी के साथ मिल कर सामूहिक रूप से इस पावन स्थल का जीर्णोद्धार करवाया था वो भी खुद के सामर्थ्य से जिसमे किसी राजनेता का प्रतिशत मात्र भी सहयोग नहीं था . इसके अतिरिक्त सुदर्शन न्यूज़ के प्रधान सम्पादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी से UPUday  नाम के कॉन्क्लेव में भी इस पावन स्थल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में विकसति करने की मांग की थी जो आज तक अनुत्तरित है . सुदर्शन न्यूज़ एक क्रूर आक्रान्ता के इस निरर्थक सम्मान और एक वीर बलिदानी के इस अपमान की आवाज यथासम्भव उठाता रहेगा जब तक कि तुष्टिकरण की नीति से पोषित इस तथाकथित राजनीति अपने असल स्वरूप में नहीं आ जाती . 

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