क्रान्तिकारियो की आत्मा कराह उठी कभी लालू के खास रहे इस नेता की मांग के बाद . क्या जनता माफ़ कर देगी इन्हें ?

यदि जनता ने आगे बढ़ कर इस चक्रव्यूह को न तोडा तो आने वाले समय में भारत की अखंडता का होने वाला नुक्सान लालू प्रसाद यादव की पार्टी के कुछ नेता दिखा रहे हैं . हैरानी की बात ये है कि जय श्रीराम , वन्देमातरम और भारत माता की जय के नारों को साम्प्रदायिक बताने वाले तथाकथित ना और सेकुलर मीडिया इस मामले में एकदम खामोश हो कर सिर्फ मूक सहमति देती दिख रही है .. ये वही देश है जिसकी अखंडता को बनाए रखने के लिए बिस्मिल भगत और चन्द्रशेखर आज़ाद जैसे क्रांतिवीरों ने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया लेकिन उन्होंने कतई उनके द्वारा स्वतन्त्र कराये भारत में ऐसे बयानों की कल्पना नहीं की होगी जो अंग्रेजो से भी ज्यादा घातक परिणाम दें . 
विदित हो कि देश के खिलाफ और हिन्दुओ को निशाने पर ले कर अपने बयान के लिए बेहद कुख्यात लालू प्रसाद यादव की पार्टी के इस बयान के बाद अब मच गया है राजनीति का घमासान . हिंसक हुए भारत बंद में जनता को शान्ति की सलाह के बदले लालू प्रसाद यादव के बेहद करीबी और राजद के एक पूर्व मंत्री ने एक नई मांग उठा दी है जो देश की अखंडता को सीधी चुनौती देती दिख रही है .. इस बयान के बाद तेजस्वी यादव ख़ामोशी से इसको मूक सहमती देते दिखे हैं .
बिहार के पूर्व मंत्री और लालू के साथ शरद यादव के भी बेहद ख़ास रहे रमई राम ने एक अलग देश की पैरवी की है जिसका नाम उन्होंने दिया है “हरिजिस्तान” .. अपने इस देश विभाजक बयान के समर्थन में इस नेता ने मंगलवार को कहा कि अगर देश के अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों को संविधान द्वारा मिले अधिकार नहीं दिये गए और उन अधिकारों की रक्षा नहीं की गई तो भारत में अलग हरिजिस्तान की मांग फिर से उठ सकती है। कालीबाड़ी रोड स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा अगर संविधान से मिले अधिकार देश के अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के लोगों को नहीं दिये गए और उन अधिकारों की रक्षा नहीं की गई तो भारत में फिर से अलग हरिजिस्तान की मांग उठ सकती है। 
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