कभी #मुलायम ने कहा था- “बच्चे हैं, गलती हो जाये तो फांसी दोगे क्या ? #NarendraModi ने स्वीकार की मुलायम की चुनौती और बोले- “हाँ”

पूरे देश उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा सपा नेता मुलायम सिंह यादव का वो बयान याद होगा जिसमें उन्होंने बलात्कार को लेकर कहा था कि बच्चों से गलती हो जाती है. बच्चों से गलती हो गयी तो फांसी दोगे क्या? लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलायम सिंह यादव की उस चुनौती को स्वीकार कर लिया है तथा घोषणा कर दी है कि हाँ अब बलात्कारियों को फांसी दी जायेगी. केंद्र की मोदी सरकार ने बलात्कार को लेकर नया अध्यादेश जारी किया है जिसमें नाबालिगों से बलात्कार करने वाले को फांसी की सजा का प्रावधान है.

मोदी सरकार के इस अध्यादेश आईपीसी, एविडेंस एक्ट, सीआरपीसी और पॉक्सो एक्ट में संशोधन की बात कही गई है. ये जानना जरूरी है कि बलात्कार जैसे जघन्य अपराध क खिलाफ लाये गये नरेंद्र मोदी जी की सरकार के इस नये कानून में क्या-2 प्रावधान किये गये हैं….आइये बिन्दुवार जानते हैं कि अब बलात्कार के खिलाफ ये कानून क्या होंगे—

• पहले महिलाओं से रेप की न्यूनतम सजा 7 साल सश्रम कारावास थी, इस अध्यादेश में इसे बढ़ाकर 10 साल करने का प्रावधान है. सजा को उम्रकैद तक बढ़ाया भी जा सकता है.
• 16 साल से कम उम्र की लड़की से रेप पर न्यूनतम सजा को 10 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया है. इस सजा को आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है.
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी.
• 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप के लिए बेहद कड़ी सजा का प्रावधान है. दोषी को कम से कम 20 साल या आजीवन कारावास या फांसी की सजा दी जाएगी.
• 12 साल से कम उम्र की बच्ची से गैंगरेप के दोषियों को आजीवन कारावास या मौत की सजा दी जाएगी.
• रेप के हर मामले की जांच किसी भी हाल में 2 महीने के अंदर पूरी की जाएगी.
• रेप मामलों में अपील और अन्य सुनवाई के लिए अधिकतम छह महीने का वक्त दिया जाएगा.
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप या गैंगरेप के आरोपी के लिए अग्रिम जमानत का कोई प्रावधान नहीं होगा. 
• 16 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप मामले में बेल पर सुनवाई से पहले कोर्ट को पब्लिक प्रोसिक्यूटर और पीड़िता पक्ष को 15 दिन का नोटिस देना होगा.
• राज्यों/यूनियन टेरिटरी और हाईकोर्ट्स से चर्चा के बाद नए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा.
• राज्यों में पब्लिक प्रॉसिक्यूटरों के लिए नए पद निकाले जाएंगे और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.
• सभी पुलिस थानों और अस्पतालों में रेप मामलों के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध कराए जाएंगे.
• रेप मामलों की तय समयसीमा में जांच के लिए पुलिस और अन्य स्टाफ की भूमिका तय की जाएगी.
• हर राज्य में रेप मामलों की जांच के लिए स्पेशल फॉरेंसिक लैब सेट अप किए जाएंगे.
• ये कदम नए मिशन मोड प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं जिसे तीन महीने के अंदर लॉन्च किया जाएगा.
• नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो यौन अपराधियों का एक डेटाबेस तैयार करेगा जिसमें अपराधियों की पूरी प्रोफाइल मौजूद रहेगी.
• यह डेटा नियमित रूप से राज्यों के साथ शेयर किया जाएगा ताकि पुलिस को ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, जांच और वेरिफिकेशन में मदद मिल सके.
• रेप पीड़िताओं की मदद के लिए बनाए गए वन स्टॉप सेंटरों का विस्तार हर जिले में किया जाएगा.

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