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फ्रांस व ब्रिटेन के अंदाज़ में दिल्ली में फिर वाहन को बनाया गया मौत का हथियार. पहले नुरुद्दीन ने बस से कुचला था २ निर्दोषों को, अब अशफाक ने ट्रक से रौंदा दिल्ली पुलिस के जांबाज़ को. अमर हुआ ASI जितेन्द्र सिंह

क्या फ़्रांस और ब्रिटेन का खूनी खेल भारत में भी शुरू हो चुका है . क्या अब निशाने पर नागरिको के साथ वर्दी में समाज की रक्षा कर रहे पुलिस वाले भी आ चुके हैं . क्या भारत वाले भी वही सब देखेंगे जो देख रहे ब्रिटेन और फ़्रांस के लोग या पूरे यूरोप वाले .. ऐसे तमाम सवालों को सबसे पहले तलाशने वाले शायद पहले जनसमूह में दिल्ली वालों का नाम आये क्योकि एक के बाद एक ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो पुख्ता नहीं तो सोचने पर मजबूर जरूर कर देंगी आम जनमानस को . इस बीच में आपने कई विदेशी समाचार एजेंसियों में देखा और सुना होगा कि फ्रांस , ब्रिटेन के साथ तमाम यूरोप के शहरों में आतंकियों ने गाड़ियों से कुचलकर लोगों की हत्याएं की है. कहना गलत नहीं होगा कि कई उन्मादियो ने वाहनों को एक हथियार के रूप में प्रयोग करना शुरू कर दिया है .

ठीक उसी अंदाज़ में पहले भारत की राजधानी दिल्ली के विवेक विहार में पहले बस ड्राइवर नूरुद्दीन ने कई वाहनों और लोगों को रौंदा, जिसमें 2 निर्दोष लोगों की मौत हुई, उससे पहले तो कई तरह के सवाल खड़े हुए लेकिन भारत का बुद्धिजीवी वर्ग और सत्ता खामोश रही . अब एक बार फिर से हुआ है लगभग वैसे ही एक और मामला जिसमे निशाने पर आया है एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस का जाबाज़ जो दिल्ली पुलिस में अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद था .. हैरानी की बात ये है कि लखनऊ की घटना पर इतना हल्ला मचा लेकिन जब मृतक का नामा जितेन्द्र और हिसक हो चुके ट्रक चालक का नाम अशफाक निकला तो दिल्ली के मुख्यमंत्री , उनकी पूरी टीम और उसके साथ उस समय पुलिस के खिलाफ हल्ला मचा रहे तमाम वर्ग खामोश हो गये ..

कहीं से कोई एक बार भी ये जानने की कोशिश नहीं कर रहा है कि कहीं ये यूरोप के देशो की तरह कोई आतंकी वारदात तो नहीं जिसे एक के बाद एक कर के अंजाम दिया जा रहा है . सवाल तो अपने आप खड़े हो रहे हैं कि क्या फ्रांस व ब्रिटेन की तरह नये अंदाज में आंतकी अब हिंदुस्तान को लहूलुहान करना चाहते हैं? आपको बता दें कि विवेक विहार की लाल बत्ती पर खड़े कई वाहनों को रौंदने के मामले में पुलिस ने आरोपी बस चालक को दिल्ली-यूपी के बॉर्डर से दबोच लिया था और उसकी पहचान गली नंबर-5, हमदर्द नगर, अलीगढ़ निवासी नूरुद्दीन (33) के रूप में हुई है. उस हादसे में दिल्ली सरकार के अधीनस्थ डीटीसी में काम करने वाले दो कर्मचारी सतीश कुमार और रुपेंद्र कुमार की मौत हो गई, जबकि चार अन्य जख्मी हो गए. 50 वर्षीय सतीश कुमार और ३८ वर्षीय रूपेंद्र कुमार की इसमें मौत हुई जबकि पूनम, गौतम, नरेंद्र और विनोद घायल हुए.

उस समय सुदर्शन न्यूज ने दिल्ली पुलिस पर भी सवाल खड़ा किया था कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी हिसंक हो कर वाहन चलाने वाले नुरुद्दीन को मात्र सेक्शन 304 व गैरइरादतन और 279 के तहत क्यों और कैसे बुक किया गया जबकि पुलिस उसे सर्विलांस पर लगाकर पकड पाई थी . .अब उसी श्रंखला में बदहवास हो कर दिल्ली के घोषित नो एंट्री जोन में ट्रक चला रहे एक हिंसक चालाक अशफाक ने दिल्ली के धौला कुंवा के पास नो एंट्री जोन में दिल्ली पुलिस के जांबाज़ और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी एएसआई जितेंद्र सिंह को बेरहमी से कुचल डाला जो अपने कर्तव्य को निभाते हुए उसे रोकने की कोशिश की तो अशफाक ने ट्रक रोकने की बजाए उन ट्रक पर चढ़ा दी, जिसकी वजह से एएसआई की मौत हो गई।

यद्दपि पुलिस फ़ौरन ही सक्रिय हुई और अशफाक भी इस घटना के बाद ट्रक ले कर भागता रहा लेकिन तकरीबन पांच किलोमीटर तक ट्रक का पीछा करके पुलिस ने अशफाक को आखिकार गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ड्राइवर के पास ना तो लाइसेंस है और ना ही उसके पास गाड़ी से जुड़े जरूरी दस्तावेज हैं। जानकारी के अनुसार आरोपी ट्रक ड्राइवर 22 साल का अशफाक है जो मेवात के जमालपुर गांव का रहने वाला है। यहाँ मस्जिदों के आतंकी फंडिग के मामलों के साथ हिन्दुओ के पलायन और पशुओ के चोरी और गौ हत्या की घटनाए आम बातों जैसी हैं .  वहीं इस हादसे में बलिदान हुए ASI UP के बागपत के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटी और एक बेटा है। उनका परिवार पालम में रहता है। आरोपी ड्राइवर का नाम अशफाक हैजिस वक्त वह नो एंट्री जोन में घुसा था उस वक्त वह अकेला ही ट्रक दौडाए जा रहा था और उसके साथ कोई हेल्पर भी नहीं था। पुलिस के अनुसार एएसआई जितेंद्र सिंह मंगलवार की सुबह धौलाकुंवा से महिपालपुर-गुड़गांव जाने वाली गाड़ियों पर निगरानी रखने के लिए तैनात किए गए थे।

जिस वक्त यह घटना हुई जितेंद्र सिंहं के साथ सिपाही पवन सिंह, संदीप और विजयपाल भी तैनात थे। इसी दौरान सुबह तकरीबन 7.41 बजे एक ट्रक काफी रफ्तार के साथ नो एंट्री जोन में घुसने लगा, तभी जितेंद्र सिंह ने उसे रोकने की कोशिश की लेकिन ट्रक ड्राइवर ने गाड़ी की रफ्तार को कम करने की बजाए उसे और बढ़ा दिया और जितेंद्र सिंह को टक्कर मार दी। हादसे के बाद जितेंद्र सिंह को वसंत कुंज के अस्पताल में ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। जितेंद्र सिंह परिवार में अकेले कमाने वाले थे। जितेंद्र बड़ी बेटी के लिए जितेंद्र लड़के की तलाश कर रहे थे। दो साल पहले ही जितेंद्र सिंह को एएसआई के पद पर पदोन्नत किया गया था। यद्दपि इस   खबर की अंतिम पुष्टि अभी बाकी है लेकिन सवाल खड़ा   जरूर होता  है कि कहीं फ्रांस और ब्रिटेन जैसे मामलों की शुरुआत दिल्ली में भी तो नहीं हो चुकी है जिस पर सोच समझ कर पर्दा डाला जा रहा हो .

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