सैनिकों की जान को मामूली बताते हुए पाकिस्तान को महान बोल गया ये नेता… दिख रहा तथाकथित धर्मनिरपेक्षता का असली असर

भारत की तथाकथित सेक्यूलर राजनीति ने एक बार पुनः ललकारा है अपनी जान पर खेलकर हिंदुस्तान तथा हिन्दुस्तानियों की रक्षा करने वाली भारतीय सेना को तथा तथा महान बताया है उस नापाक मुल्क पाकिस्तान को आये दिन हिन्दुस्तानी फौजियों की जान ले रहा है तथा भारत के टुकड़े करने का मंसूबा पाले हुए है. नेशनल कांफ्रेंस के नेता तथा जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला के भाई शेख मुस्तफा मुस्तफा कमाल ने सैनिकों की जान को मामूली बताते हुए कहा है कि ये पाकिस्तान की महानता है जो वह भारत को वार्ता का न्यौता दे रहा है लेकिन भारत सरकार उस न्यौते को ठुकरा रही है.

मुस्तफा कमाल ने कहा कि भारत द्वारा पाकिस्तान से बातचीत को रद करने के लिए जवान को मारने की घटना का हवाला देना बहुत छोटी सी बात है. उन्होंने कहा कि जवान को मारने की घटना भारत के लिए वार्ता रद करने के लिए छोटी सी घटना है. भारत ने एेसा करके पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री को सही मायनों में दबाने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि इस समय अंतरराष्टीय सीमा पर जो हालात बने हैं, वे भारत सरकार के अडियल रवैये के कारण है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी दोनों देशों के बीच बातचीत चाहती है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की सराहना करते हुए मुस्तफा कमाल ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता हो, यह हर कोई चाहता है. पाक के नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने इसकी पहल की जो पाकिस्तान की महानता थी लेकिन भारत पीछे हट गया.

बता दें कि पिछले हफ्ते शहीद हुए तीन जवानों के बाद पाकिस्तान के दोहरे चरित्र का पर्दाफाश करते हुए भारत सरकार ने न्यूयॉर्क में होने वाली दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की होने बैठक को रद कर दिया. भारत सरकार ने कहा कि पाकिस्तान एक तरफ रिश्ते सुधारने के लिए वार्ता का प्रस्ताव दे रहा है और दूसरी तरफ आतंकियों को बढ़ावा देने की सरकारी नीति को जारी रखना चाहता है तथा हमारे जवानों की ह्त्या कर रहा है, ऐसे में पाकिस्तान से वार्ता का कोई मतलब ही नहीं है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने भारत के फैसले को सुनाते हुए कहा था कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ स्वराज की बैठक की घोषणा के साथ ही दो बेहद चिंताजनक गतिविधियां हुई हैं. एक तो पाकिस्तान स्थित संगठनों ने हमारे सुरक्षाकर्मियों की नृशंस हत्या की है जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तान सरकार की तरफ से एक आतंकी को सम्मान देते हुए 20 डाक टिकट जारी किये गये हैं. इससे साफ है कि पाकिस्तान अपना रास्ता बदलने को तैयार नहीं है इसलिए पाकिस्तान से वार्ता का कोई मतलब ही नहीं बनता.

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