म्यांमार में अब जो हुआ उसको कोई वहां के सरकार की विफलता नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश मान रहे हैं.. क्या होगा उन 40 का ?

पिछले कुछ समय से दुनिया के सबसे चर्चित देश के रूप में म्यन्मार रहा है . यहाँ पर जिस प्रकार से पहले रोहिंग्या आतंकियों ने बौद्धों पर अत्याचार किया वो भले ही कहीं नहीं दिखाया और सुनाया गया हो स्वघोषित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों के चलते लेकिन उसके बाद अपने देश और संस्कृति की रक्षा के लिए बौद्धों द्वारा दिया गया प्रतिउत्तर दुनिया भर में चर्चा ही नहीं बल्कि विवाद का विषय बना डाला गया . फिलहाल एक समय आने तक म्यन्मार ने भी दुनिया के किसी देश की दखलंदाजी सहना बंद कर दिया और अपने देश को ही आगे रखते हुए वो तमाम कार्यवाही करता रहा जो आतंकवाद के सफाए की एक ऐसी नजीर बनी जिसने इजरायल जैसे देशो को पिछाड दिया ..

सेना और नागरिक एक हो गये थे रोहिंग्या आतंकियों के खिलाफ और फिर वहां हुए प्रतिकार में न सिर्फ आतंकियों को भागना पड़ा बल्कि उसके साथ परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जुड़े लोगों को भी पलायन करना पड़ा .. दुनिया इस मामले में हो हल्ला मचाती रही लेकिन किसी भी देश ने उनको अपने यहाँ रखने से मना कर दिया सिर्फ भारत और बंगलादेश को छोड़ कर . इसके बाद म्यन्मार के कुछ कारनामे दुनिया में चर्चा के विषय बने . पहला तो रोहिंग्या आतंकियों के गाँवों को एक तरफ से ध्वस्त करते हुए उनकी पहिचान सदा सदा के लिए मिटा देना जिस से वो दुबारा किसी कानूनी हक से उस देश में न घुस पायें . अब एक और मामले ने दुनिया की नींद उड़ा कर रख दी है .

हैरानी की बात ये है कि अन्तराष्ट्रीय मामले के कुछ जानकार इसको म्यन्मार सरकार की विफलता नहीं बल्कि म्यन्मार की एक बार फिर से एक और सोची समझ साजिश बता रहे हैं . ध्यान देने योग्य है कि म्यांमार के कायिन में रविवार को लगभग 40 कैदी जेल तोड़कर फरार हो गए। कायिन जेल विभाग के एक अधिकारी ने सिन्हुआ को बताया कि कैदी जेल अधिकारी की कार लेकर फरार हो गए। कैदियों ने सुबह 8.45 बजे जेल के दरवाजे तोड़कर फरार हो गए। इस घटना में एक जेल अधिकारी घायल हुआ है। वह भाग रहे कैदियों को पकड़ने की कोशिश कर रहा था। क्षेत्रीय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। कुछ लोगो का कहना है कि भागे गये रोहिंग्या बंदी है जिन्हें म्यांमार की पुलिस द्वारा इनकाऊटर में मार गिराने का ये पूरा प्लान खुद सरकार की तरफ से रचा गया है . असल में आम लोगों का मानना है कि एक साथ 40 कैदियों का भागना लगभग असम्भव है और ये सब एक सोची समझी साजिश है जेलों में बंद तमाम अपराधियों को एक एक कर के उसी अंदाज़ में खत्म कर देने की जैसे अभी हाल में ही सेना ने मयन्मार में किया था . फिलहाल ये पहला ऐसा मामला है शायद दुनिया का जिसमे इतनी बड़ी घटना को कोई सरकार की कमजोरी नहीं बल्कि सीधे सीधे साजिश मान रहा है जिसमे हर जुबान पर एक सवाल है कि – ‘ उन 40 का क्या होगा ?’

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