पहले रोहिंग्या भेजे गये तो अब 21 बांग्लादेशियों को भेजा गया वापस… एक ऐसा राज्य जो पेश कर रहा आदर्श उदाहरण

कुछ समय पहले जब रोहिंग्या घुसपैठियों को वापस म्यांमार भेजा गया था तब संयुक्त राष्ट्र तथा तमाम मानवाधिकारी संगठनों ने हिंदुस्तान के इस कदम की आलोचना की थी लेकिन इस आलोचना से बेपरवाह हिंदुस्तान ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुतारकांडी-करीमगंज आव्रजन जांच चौकी (आईसीपी) से दो साल बाद शनिवार को दो महिलाओं सहित 21 बांग्लादेशी नागरिकों को उनके देश वापस भेज दिया गया. ये बांग्लादेशी भी उसी असम से वापस भेजे गये हैं जहाँ से रोहिंग्याओं को वापस भेजा गया था.

गुवाहाटी में असम पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि गृह मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद 21 विदेशियों को उनके देश वापस भेज दिया गया. इनको आईसीपी पर असम सीमा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) को सौंप दिया गया. असम पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक भास्करज्योति महंत ने कहा कि दो महिलाओं समेत 21 अवैध शरणार्थियों को बांग्लादेश के अधिकारियों को सुतार्कंदी एकीकृत जांच चौकी पर सौंप दिया गया. यह स्थान असम के करीमगंज जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा से लगी हुआ है. पुलिस सूत्रों ने कछार में बताया कि इन विदेशियों को पासपोर्ट अधिनियम का उल्लंघन करने के लिए हिरासत में लिया गया था. उन्होंने बताया कि वे दो साल पहले त्रिपुरा होकर अवैध रूप से असम में घुसे थे.

करीमगंज पुलिस ने बताया, बांग्लादेशियों को सिलचर की कछार केंद्रीय कारागार में हिरासत में रखा गया था, जहां से उन्हें बांग्लादेशी अधिकारियों को सौंपने के लिए विशेष बस से सीमा तक ले जाया गया. निर्वासित किए गए लोगों की पहचान नासिर हुसैन, अब्दुल वाहिद, मोहम्मद खैरूल, जाहिदा बेगम, सूफिया बेगम, मिहिर पेबेल मियां, शफीक इस्लाम, सवील अहमद, रमजान अली, बबलू अहमद, सुमन फाकिर, मासूम अहमद, नाजिमुद्दीन, असरफुल आलम चौधरी, लितुन कांति दास, तौफीक अली, राजू अहमद, दिलावर हुसैन, मो. सुक्कुर, समीम अहमद और रूबैल अहमद शामिल हैं.

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