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सीरिया व इराकी घुसपैठियों के बोझ से दबा फ्रांस गृहयुद्ध के कगार पर.. सड़को पर दिख रहे नकाबपोश जो हमला कर रहे पुलिस पर और जला रहे हैं घर

कुछ समय पहले यही देश दुनिया के बेहद खूबसूरत पर्यटक स्थलों के साथ अपनी ठाठ बाट व अमीरी के लिए जाना जाता था .. चाहे तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में युद्ध हो या इराक में isis के विरुद्ध .. इस देश की बात की धमक अन्तराष्ट्रीय स्तर पर बहुत मायने रखती थी .. लेकिन अब वही फ्रांस इस स्तर पर आ गया है जहां सड़को पर गरीबी और महंगाई के चलते उतर गए हैं लोग और भिड़ गए हैं अपने ही देश की पुलिस व सुरक्षा बल से..

ये वही फ्रांस है जो एक के बाद एक आतंकी हमलों से जूझता रहा है . ये हमला सिर्फ फ्रांस के व्यक्तियों पर नही बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था पर भी था जो मुख्य रूप से पर्यटन हुआ करती थी .. आतंकी हमलों से वही पर्यटन कारोबार की रीढ़ टूट गयी है और अब वही फ्रांस अग्रसर है गृहयुद्ध की तरफ ..अब तक मिली जानकारी के अनुसार प्रदर्शनकारियों के कुछ समूह सेंट्रल पैरिस की सड़कों पर हथियार लेकर घूम रहे हैं। इन लोगों ने कई वाहनों और बिल्डिंगों को आग के हवाले कर दिया है। इसे पिछले एक दशक का सबसे खतरनाक दंगा माना जा रहा है। इस दंगे में उन तमाम घुसपैठियों के शामिल होने का अंदेशा जताया जा रहा है जो इराक सीरिया के युद्ध के दौरान फ्रांस में दया की मांग करते हुए घुस गए थे.. सूत्रों के अनुसार बिल्डिंगों में लूटपाट को वही अंजाम दे रहे हैं ..

फ्रांस में पिछले एक दशक की सबसे भयंकर गृह अशांति की स्थिति बनी हुई है . तेजी से बढ़ी एक वर्ग की आबादी व ऊपर से घुसपैठियों का बोझ झेल रहे फ्रांस में महंगाई और पेट्रोल के दाम बढ़ने से नाराज नकाब पहने प्रदर्शनकारियों ने वाहनों और बिल्डिंगों में आग लगाई.. इतना ही नही , हर प्रयास के बाद असफल रही फ्रांस की सरकार इस बेहद विकट स्थिति में आपातकाल लागू करने पर विचार कर रही है .. मीडिया कोयह जानकारी फ्रांस सरकार के प्रवक्ता बेंजमिन ग्रीवोक्स ने दी. यूरोप 1 रेडियो से बातचीत में सरकार के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमें कुछ ऐसी कार्रवाई करनी होगी, ताकि ऐसी हरकत फिर न हों।’इस प्रदर्शन को ‘येलो वेस्ट’ का नाम भी दिया गया है। प्रदर्शनकारी पीले रंग की वेस्ट पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन शनिवार को उस समय उग्र हो गया, जब इनमें से कुछ लोगों ने वाहनों और बिल्डिंगों में आग लगानी शुरू कर दी।

फ्रांस की राजधानी पेरिस में प्रदर्शन कर रहे 288 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि लगभग 100 लोग घायल हो गए। इसी मुद्दे पर फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों प्रधानमंत्री और आंतरिक मामलों के मंत्री के साथ रविवार शाम को मीटिंग करने वाले हैं। इस मीटिंग में दंगाइयों से निपटने का रास्ता निकालने पर चर्चा होगी। परेशानी इस बात की है कि इन प्रदर्शनकारियों का कोई चेहरा नहीं है, जिससे सरकार बात कर सके। वो सभी ठीक उसी प्रकार से नकाब में हैं जैसे ISIS के आतंकी नकाब में हुआ करते हैं..

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