आज ही हुआ था शार्ली एब्दो पर आतंकी हमला जिसमें मारे गए थे 12 लोग.. पर आज तक चुप हैं अभिव्यक्ति की आज़ादी के तथाकथित पैरोकार

7 जनवरी 2015 10:30  को AK47 से लैस दो बंदूकधारियों ने इस्लाम समर्थक नारे लगाते हुए फ्रांसीसी अखबार चार्ली हेब्दो के दफ्तर पर धावा बोला और 12 लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी जिसमें से दो पुलिस अफ़सर थे। नकाबपोश हमलावरों ने कथित तौर पर एक कार अगवा कर ली और वे जल्द ही भाग निकले। उन्होंने एक राहगीर को कुचल दिया और अधिकारियों पर गोलियां चलाई। हमलावर एक स्वचालित रायफल कालशनिकोव और रॉकेट लॉंचर से लैस थे। हमलावर जोर-जोर से कह रहे थे, “हमने पैगंबर का बदला लिया है” और “अल्लाहु अकबर” के नारे लगा रहे थे।

चार्ली हेब्दो फरवरी 2006 में एक कार्टून छापने को लेकर चर्चा में आया था, इस कार्टून को लेकर मुस्लिम जगत में रोष छा गया था। इसके कार्यालयों पर नवंबर 2011 में गोलीबारी हुई थी और बम फेंके गए थे, जब इसने पैगंबर का कार्टून प्रकाशित किया था। ऐसा किया जाना इस्लाम के खिलाफ है। नस्लवाद रोधी कानूनों को लेकर अदालत में घसीटे जाने के बावजूद साप्ताहिक अखबार ने पैगंबर के कार्टून को प्रकाशित करना जारी रखा। इससे पहले संपादक स्टीफन को जान से मारने की धमकियां मिली थी और उन्हें पुलिस हिफाज़त मुहैया करायी गई थी।

कार्टूनिस्ट कोरीन रे उर्फ ‘कोको’ उन लोगों में से हैं जिन्होंने बिल्डिंग के भीतर छिपकर अपनी जान बचाई. उन्होंने दावा किया कि हमलावर सधी हुई फ्रेंच भाषा बोल रहे थे और खुद को अलकायदा का बता रहे थे. उन्होंने बताया, ‘हमला पांच मिनट तक चला. उन्होंने वोलिंस्की और काबू को गोली मार दी. मैं एक डेस्क के नीचे छिप गया. वे परफेक्ट फ्रेंच बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि वे अलकायदा से हैं.’

फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने इसे ‘आतंकी हमला’ बताया. उन्होंने ट्विटर पर लिखा कि कोई भी बर्बर हमला प्रेस की आजादी को खत्म नहीं कर सकता. हम हमले के खिलाफ एकजुट हैं.’ भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हमले की निंदा की और कहा कि भारत फ्रांस के लोगों के साथ है. राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी हमले की कड़ी निंदा की.

 

 

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