एक गोताखोर जो वीरगति पाया था थाईलैंड की गुफा से बच्चो को बचाते हुए. सैल्यूट कर रही दुनिया उस हीरो जो जिया दूसरों के लिए

थाईलैंड की गुफा में फंसे सभी 12 बच्‍चों और उनके कोच को सुरक्षित बाहर निकाल दिया गया है। गुफा से निकाले गए सभी बच्चे और कोच स्वास्थ्य बताए जा रहे हैं। गुफा में फंसे बच्‍चों की उम्र 11 वर्ष से 16 वर्ष थी और उनके कोच की उम्र 25 वर्ष है। ये सभी लोग प्रैक्टिस मैच खत्‍म होने के बाद थाम लुआंग नांग नोन गुफा घूमने गए थे। फुटबॉल की यह युवा टीम 23 जून से फंसे गुफा में फंसे हुए थे।  ये सभी बच्‍चे फुटबॉल ट्रेनिंग से लौट रहे थे जिस समय गुफा में रह गए। जो बच्‍चे निकाले गए हैं उन्‍हें चियांग रसइ प्रानुक्रोह हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। बच्‍चों को उनके माता-पिता और बाकी रिश्‍तेदारों से अभी दूर रखा जा रहा है।

डाक्टरों का मानना है कि इस समय इंफेक्‍शन का खतरा बहुत ज्‍यादा है। इस राहत कार्य में 19 ऑस्‍ट्रेलियाई भी शामिल हैं जिसमें एक‍ डॉक्‍टर भी शामिल है। लेकिन इन सब की जिंदगी बचाने में और पूरी दुनिया के चेहरे पर ये मुस्कान लाने में एक जांबाज़ का बलिदान शामिल है जिसने गोताखोरी करते हुए इन सभी को बचाने के लिए अपने प्राण दे दिए .. उसका नाम है समन कुनान.. 38 साल के इस जांबाज़ गोताखोर ने अपनी जान इन मासूमो को बचाने में दे दी . 

समन कुनान थाईलैंड नौ सेना के स्पेशल सील कमांडो थे जिन्होंने अपना अधिकतर समय समुदंर की लहरों में बिताया था  . बच्चे जिस गुफा में फंसे हुए हैं उसका नाम थाम लुआंग है. जो थाईलैंड की चौथी सबसे बड़ी गुफा है. इसकी लंबाई 10 किलोमीटर से भी अधिक है.सभी 12 बच्चे अपने फुटबॉल कोच के साथ पिछले महीने 23 तारीख को गुफा में घूमने गए थे. लेकिन बाढ़ का पानी गुफा में घुसने की वजह से भी फंस गए. बच्चों को बचाने के लिए कई देशों के करीब 90 गोताखोर लगे हुए थे . इन 90 अलग अलग देशो के गोताखोरों में एक गोताखोर समन कुनान वीरगति को प्राप्त हुए ..

सुनाई जैसे पानी में निर्भीकता से गोता लगा कर बाकी गोताखोरों के प्रेरणा स्रोत बने समन कुनान के लिए थाईलैंड के राजा ने भी शोक प्रकट करते हुए उनके अंतिम संस्कार को भव्य रूप से शाही अंदाज़ में अंतिम विदाई देने का आदेश दिया है . अपने फेसबुक पर अपनी अंतिम पोस्ट गर्व के साथ उन मासूमो की रक्षा के लिए उस गुफा में घुसने के साथ लगाने वाला ये वीर सदा सदा सदा के लिए वीरगति को प्राप्त हो चुका है . ये वही जीवन है जो अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए काम आता है .. समन कुनान आज दुनिया के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं . सुदर्शन परिवार भी ऐसे वीर को श्रद्धांजलि अर्पित करता है . 

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