अपने देश के हित में दिए गए इजरायल की अदालत के फैसले से काँप गए कई इस्लामिक मुल्क. अदालती आदेश के हर शब्द में सनी हुई है देशभक्ति

भले ही कुछ देशों में अदालतों ने वहां की मूल संस्कृति और मूल सिद्धांतो से हट का फैसले देने का मन बना लिया हो लेकिन कहीं कोई एक देश ऐसा भी है जहाँ का नागरिक , जहाँ के सैनिक और जहाँ की अदालत हर शब्द और हर कार्य के पीछे केवल एक ही भावना रखती है कि किस प्रकार से देश का भला हो और देश के दुश्मनों का दमन हो . जी हाँ . इस देश का नाम है इजरायल जो इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ संसार का सबसे बड़ा स्तम्भ माना जाता है . क्षेत्रफल और जनसंख्या में बाकी कई देशों से काफी कम रहने वाला इजरायल अपने देशभक्ति और जज्बे के चलते दुनिया के हर देश के लिए खौफ के समान बना रहता है .

ज्ञात हो की इजरायल के नागरिको की और इजरायल की सेना की देशभक्ति पहले से ही जगजाहिर थी लेकिन अब इजरायल की अदालत ने भी एक ऐसा फैसला लिया है जो दुनिया में वहां की न्यायव्यवस्था के अन्दर झलकती देशभक्ति की भावना को चर्चित कर दिया है ..विदित हो कि इजरायल की सेना ने सीमा से सटे एक फिलिस्तीनी गाँव पर कब्जा किया था जिसको हमास आतंकियों की शरणगाह माना जाता था . इजरायल की सेना के अनुसार वो गाँव वेस्ट बैंक में मौजूद था जिसका नाम बेडौइन खान अल-अहमार गांव था . बतौर इजरायली सेना उस गाँव का उपयोग फिलिस्तीन चरमपंथी एक लांच पैड के रूप में करते थे जिसके लिए वो गाँव को बारूद से उड़ा देना चाहती थी .

लेकिन फिर कुछ तथाकथित सेकुलर और स्वघोषित मानवाधिकार वालों ने इजरायल की सेना के इस आदेश को इजरायल की ही एक अदालत में चुनौती दी और गाँव के ध्वस्त होने के बाद होने वाले नुक्सान अदि को बताते हुए अदालत से सेना को ऐसा करने से रोकने की मांग की . उस समय सबकी नजर इजरायल की अदालत पर थी लेकिन आखिरकार इजरायल की अदलात ने अपना फैसला दिया . इजरायल की अदालत ने अपनी सेना की कार्यवाही का पूरा समर्थन करते हुए सेना द्वारा चिन्हित गांव को तत्काल ध्वस्त करने का देश दिया और साथ में पुलिस को आदेश दिया कि उस गाँव में रहने वाले 180 निवासियों को फ़ौरन ही वहां से निकाल कर बाहर करे . ये फैसला इजरायल के उच्च न्यायालय ने दिया.

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