कला का सम्मान ??? चीन के सबसे बड़े मुस्लिम संगीतकार “अब्दुर्रहीम हेयीत” का ये हुआ हाल

कला के सम्मान की बात कर के भले ही कुछ देशो में इस हद तक कुछ लोग उतर जाया करते हों कि देश के उन तमाम शत्रुओ तक को संरक्षण देने लगते हों जो अपने देशो से जहर के सिवा कुछ भी नहीं उगलते हों . कभी फिल्म की कला के बहाने तो कभी खेल की कला के बहाने कुछ बेहद सक्रिय कथित बुद्धिजीवी अक्सर देश के शत्रुओ को गले लगाने आदि के बयान दे कर सुर्खियों में रहते हैं लेकिन एक ऐसा देश भी है जिसके लिए कला आदि का कोई स्थान नहीं है और न ही कोई सम्मान जब बात राष्ट्र हित की हो .

ज्ञात हो कि वो देश चीन है जो अपने बेहद कड़े नियम और कानून के लिए जाना जाता है . चीन एक बार फिर से दुनिया के परिदृश्य पर है लेकिन किसी भी देश का दिया दबाव चीन को इंच भर भी नहीं हटा पाया है . विदित हो कि चीन में वहां के सबसे बड़े मुस्लिम संगीतकार अब्दुर्रहीम हेयीत की जेल में ही मौत हो गयी है . चीन ने उनको एक लम्बे समय से वहां के तमाम मुसलमानों के साथ जेल में डाल में रखा था और गम्भीर प्रताड़ना दी थी . इनकी कला आदि को किनारे रख कर चीन ने इनको 8 साल की सजा दी थी .

सूत्रों से मिल रही रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि चीन ने उनको गम्भीर प्रताड़ना दी थी और उनको कई कई दिन खाने आदि से भी दूर रखा जाता था . एक बड़ा संगीतकार होने के नाते तमाम मुस्लिम देश उनके लिए चीन द्वारा नरमी की आशा कर रहे थे लेकिन चीन ने उनको आम अन्य कैदियों से भी ज्यादा प्रताड़ना दी और आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया है . इस मुद्दे पर मुस्लिमों के साथ बिना सोचे खड़े होने वाले संसार के तमाम वामपंथी विचारधारा वाले लोग खामोश हैं जिसके पीछे चीन का वामपंथी देश होना और दुनिया भर के वामपंथ को पोषण देना मुख्य कारण बताया जा रहा है .

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