चीन बोला- “मालदीव मुद्दे पर भारत चुप रहे “..अब भारत ने भी बोला- ‘मालदीव मुद्दे पर चीन चुप रहे”

भारत की बढती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति के चलते चीन, भारत से हर कदम पिछड़ते जा रहा है, और वह नहीं चाहता की भारत

डोकलाम के बाद उसे मालदीव के मुद्दे पर भी मात दे. चीन, मालदीव में भारत के हस्तक्षेप को लेकर काफी समय से धमकियाँ देते आ रहा है, लेकिन भारत ने स्पष्ट

कह दिया है, कि मालदीव मुद्दे पर चीन चुप रहे.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा है कि मालदीव मुद्दे पर चीन का चुप रहना ही उसके लिए बेहतर होगा, भारत भली भांति जानता है कि उसे कहा

हस्तक्षेप करना है, और कहाँ नहीं करना है.

चीन को परोक्ष रूप से आगाह करते हुए कहा कि मालदीव में सुरक्षा संबंधी मामलों में चीन का हस्तक्षेप वर्तमान स्थिति

पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. कहा कि हमे ज्ञात है चीन मालदीव सरकार को हर तरह से अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमे उम्मीद है

सभी देश मालदीव में एक रचनात्मक भूमिका निभाएंगे बजाय उसके विपरीत करने के. भारतीय पत्रकार मणि शर्मा को मालदीव प्रशासन द्वारा हिरासत में लिए जाने

संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा की भारतीय दूतावास को इस बारे में स्थानीय प्रशासन से संपर्क करने और अधिक जानकारी हासिल करने को कहा गया है.

मालदीव में उत्पन्न हुए राजनितिक संकट का लाभ लने के लिए चीन कोई भी मौका छोड़न नहीं चाहता है.

चीन ने मालदीव को अपने कर्ज के बोज तले चारों ओर

से घेर रखा है, मालदीव के कुल अंतरराष्ट्रीय कर्ज में करीब दो-तिहाई हिस्सेदारी अकेले चीन की है. पाकिस्तान के बाद मालदीव चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते

पर हस्ताक्षर करने वाला दूसरा देश बन गया है. महज सवा 4 लाख आबादी वाला यह छोटा सा देश भारत के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और यह अपनी भौगोलिक

स्थिति की वजह से रणनीतिक लिहाज से काफी मायने रखता है. मालदीव रणनीतिक रूप से कितना कारगर साबित हो सकता है यज चीन भली भांति जानता है,

इसीलिए चीन मालदीव में पानी की तरह पैसे बहा रहा है.

राजनीति के विशेषज्ञों का कहना है कि चीन वहां इसलिए पैसे नहीं लगा रहा, कि वह उसके लिए कोई

आकर्षक बाजार है, बल्कि वह मालदीव में मिलिटरी बेस बनाने की तैयारी कर रहा है. अपने पद से बर्खास्त हुए मौजूदा तानाशाह अब्दुल्ला यामीन को चीन का करीबी

माना जाता है. और यही वजह है, कि चीन नहीं चाहता भारत, मालदीव में पैदा हुए राजनितिक संकट में हस्तक्षेप करे. बता दें कि मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद

नशीद देश में गहराते संकट के बीच भारतीय सेना से मदद मांग चुके है.
वहीँ चीन, मालदीव में कई परियोजनाओं में निवेश कर रहा है. हैरानी की बात यह है कि 2011 तक मालदीव में जिस चीन का दूतावास तक नहीं था, वह अब वहां

की घरेलू राजनीति में गहरा असर रखता है. मालदीव अब चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड इनिशटिव (BRI) का हिस्सा है. पिछले साल चीन और मालदीव ने

फ्री ट्रेड अग्रीमेंट (FTA) पर हस्ताक्षर किए थे. चीन के साथ FTA समझौते को मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद नशीद ने देश की संप्रभुता के लिए खतरा

बताया था.

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