पहला मुस्लिम देश जो हिम्मत कर पाए चीन से ये कहने की कि – “बस, अब बंद करो मुसलमानों पर अत्याचार”

जहाँ कुछ ऐसे देश हैं जहाँ ट्रेन में हुए झगड़े तक को राष्ट्रीय आपदा बना कर उसी देश के कुछ कथित बुद्धिजीवी प्रस्तुत करने लगते हैं तो वहीँ कुछ ऐसे देश भी हैं जो अपने राष्ट्रीय स्वाभिमान के लिए चुनौती बनने वाले हर उस व्यक्ति का दमन कर देते हैं जो कोई कार्यवाही तो दूर आवाज भी उठाने की कोशिश करता है . फिलहाल इस समय चीन एक ऐसा देश बन चुका है जो मुसलमानों के खिलाफ दुनिया में सबसे ज्यादा क्रूरता दिखाने वाला देश है और वो देश किसी की सुन भी नहीं रहा है अपनी सनक के आगे . .

विदित हो कि उईगर मुसलमानों की दशा वर्तमान समय में सबके आगे खुल कर आई है जब चीन के नामी मुस्लिम संगीतकार को 8 साल की सजा मिली और आखिरकार एक लम्बी प्रताड़ना के बाद उनकी जेल में मौत हो गयी . इस मौत के बाद भी किसी भी इस्लामिक देश में हिम्मत नहीं हुई चीन के खिलाफ एक भी शब्द बोलने की . यहाँ तक कि खुद को परमाणु सम्पन्न देश बोलने वाला आतंकी उत्पादक देश पाकिस्तान भी चीन के कदमो ले लेता दिखा और अपनी जमीन ही नहीं बल्कि बचे खुचे जमीर तक पर चीन को कब्जा करवा रहा है .

लेकिन चीन के खिलाफ आवाज उठाने वाला और बंद करो मुसलमानों पर अत्याचार कहने वाला पहला देश बना है तुर्की . ये वही तुर्की है जिसने म्यन्मार में बौद्धों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की थी जब बौद्ध अपने देश में रोहिंग्या आतंकियों से लड़ने में व्यस्त थे . अब तुर्की ने चीन को भी चेतावनी दी है . चीन में अल्पसंख्यक वीगर समुदाय के एक प्रमुख संगीतकार की मौत की रिपोर्टों के बात तुर्की ने चीन से वीगर मुसलमानों के लिए बनाए गए हिरासत कैंप बंद करने की मांग की है. तुर्की के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इन लोगों का कंसंट्रेशन कैंपों में रखकर उत्पीड़न किया जा रहा है और  चीन भले ही इसको छिपाने की कोशिश कर रहा हो पर अब ये दुनिया के आगे आ चुका है और चीन को इसको बंद करना ही होगा . यद्दपि चीन पर तुर्की की इन बातों का कोई फर्क पड़ता नहीं दिखा है और उसने चीन को जवाब तक देना उचित नहीं समझा है .

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