चीन डोकलाम में दिखाता रह गया आँखें, भारत का पंवार दुल्हन बनाकर ले आया चीन की मिन्हुआ जोंग को

डोकलाम क्षेत्र में चीन भारत को आँख दिखाता रहा गया लेकिन उसके मंसूबों को भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने कामयाब न होने दिया. इधर भारतीय सेना के जांबाज जवानों ने डोकलाम में चीन को पीछे हटने को मजबूर किया तो उधर उत्तर प्रदेश के बागपत का रहने वाला रोबिन पंवार चीन की मिन्हुआ जोंग को  हिंदुस्तान की दुल्हन बनाकर ले आया. इधर भारतीय सेना ने डोकलाम फतह किया तो उधर रोबिन पंवार ने इश्क के मैदान में चीन पर फतह किया तथा मिन्हुआ जोंग के साथ शादी रचा ली.

आपको बता दें कि बागपत के रॉबिन की निगाहें चीन में रहने वाली मिन्हुआ जोंग से टकराई तो दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे. इश्क आगे बढ़ा और दोनों ने साथ जीने-मरने की कसमें खाते हुए शादी करने का फैसला कर लिया. इसके बाद रॉबिन और मिन्हुआ ने अपने-अपने परिजनों को इस बारे में बताया. परिजनों ने भी एक-दूसरे के प्रति दोनों की चाहत को देखते हुए इस रिश्ते के लिए हां कर दी. इसके बाद सोमवार को धूमधाम से बागपत के दोघट इलाके में स्थित लक्ष्मी गार्डन में रॉबिन और मिन्हुआ की शादी हुई और दोनों सात फेरों के बंधन में बंध गए.

आपको बता दें कि रॉबिन पेशे से योगा टीचर हैं और पिछले डेढ़ साल से चीन के तियुडोंग में लोगों को योग सिखा रहे हैं. मिन्हुआ जोंग भी रॉबिन के पास योग सीखने आती थीं. मिन्हुआ एक टीचर हैं और चीन के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाती हैं. योगा क्लासेस के दौरान दोनों ने एक दूसरे को पसंद कर लिया और शादी करने का फैसला लिया. परिजनों की सहमति मिलने के बाद दोनों ने अग्नि के सात फेरे ले लिए. रॉबिन अब मिन्हुआ को प्यार से मानवी बुलाते हैं.

रॉबिन और मिन्हुआ की शादी भारतीय परंपरा के अनुसार हुई. शादी में शामिल होने के लिए दुल्हन पक्ष की ओर से मिन्हुआ के पिता जिंग जोंग, मां सिओयिंग किन, मौसी और उनका भाई जैन जोंग पहुंचे. वहीं, दूल्हे की तरफ से रॉबिन के पिता सोहनवीर पंवार, उनकी मां, दोनों भाई और कुछ यार-दोस्तों के अलावा नजदीकी रिश्तेदार शामिल हुए. शादी के बाद रॉबिन के परिजन अपने बेटे की पसंद की दुल्हन पाकर खुश हैं. सुदर्शन परिवार रोबिन तथा उनकी पत्नी मिन्हुआ जोंग उर्फ़ मानवी को शादी की हार्दिक बधाई देते हुए उनके नवदांपत्य जीवन के मंगलमय होने की कामना करता है.

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