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रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने किया नई पार्टी बनाने का एलान.. ये होगा राजा की पार्टी का नाम

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के कुंडा से निर्दलीय विधायक कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने अपनी नई राजनैतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया है. 25 सालों से कुंडा से लगातार 6 बार विधायक बने राजा भैया ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से अपनी नई सियासी पार्टी का एलान किया. रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने कहा कि जनता के आदेश पर अब वो राजनीतिक पार्टी भी बनाएंगे और लोकसभा चुनाव में भी उतरेंगे. राजा भैया ने कहा कि वह 30 नवंबर को लखनऊ एक बड़ी रैली की कर आगे की रणनीति का खुलासा भी करेंगे.

राजा भैया ने कहा कि उनकी पार्टी का नाम जनसत्ता पार्टी हो सकता है. हालांकि पार्टी के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग को तीन नाम भेजे गए हैं, जिसमें जनसत्ता पार्टी, जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी और जनसत्ता दल जैसे नाम हैं.  पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए भी आयोग को पत्र लिखा गया है. आयोग ने अभी तक दोनों में से किसी पर मंजूरी नहीं दी है. अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान शुक्रवार को राजा भैया ने कहा कि वह लगातार छठी बार निर्दलीय विधायक चुने गए हैं. क्षेत्र की जनता की मांग पर वह अब अपनी पार्टी बना रहे हैं.

राजा भैया ने कहा कि चूंकि पार्टी के नाम और चिह्न पर फैसला नहीं हुआ है, ऐसे में लोकसभा चुनाव, 2019 लड़ने पर अभी कुछ तय नहीं हुआ है.‘एससी-एसटी कानून’ पर केंद्र को घेरते हुए राजा भैया ने कहा कि यह कदम न्यायोचित नहीं है. इस तरह के मामले में पहले विवेचना, फिर गिरफ्तारी होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘मैं दलित विरोधी नहीं हूं. उनका हिमायती और हमदर्द हूं. लेकिन, साथ ही एससी-एसटी कानून की आड़ में अगड़ी जातियों के उत्पीड़न के खिलाफ हूं.”राजा भैया ने कहा, ‘‘इसी तरह पदोन्नति में किसी को जाति के आधार पर नहीं बल्कि उसके काम और योग्यता के आधार पर आरक्षण दिया जाए.” राजा भैया ने कहा कि प्रमोशन में आरक्षण लोगों को हतोत्साहित करता है। उन्होंने कहा कि योग्यता के आधार पर आऱक्षण होना चाहिए. गौरतलब है कि राजा भैया का प्रतापगढ़ और इलाहाबाद जिले के कुछ हिस्से में काफी प्रभाव है. उनकी छवि एक दबंग और क्षत्रिय नेता के तौर पर है. राजा भैया अब तक भले ही कुंडा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हों, लेकिन लेकिन यूपी की करीब 24 से अधिक सीटों पर उनका सीधा दखल रहा है जहाँ उनके इशारे पर हार जीत तय होती रही है.

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