भारत की पहली वो जगह जहाँ नहीं पड़ा एक भी वोट.. ये वो हैं जो कहते हैं कि मत करो उनकी देशभक्ति पर शक

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है जहाँ अपने प्रतिनिधि को देश की जनता अपने वोट से चुनती है लेकिन वो कौन सी सोच है जिसके लिए मतदान मतलब उनके अधिकारों का हनन माना जाता है? वो कौन सी सोच है जो ये मानती है कि अगर उन्होंने हिंदुस्तान के लिए मतदान किया तो ये गुनाह होगा? वो कौन लोग हैं जो इस इस जहरीली सोच को बढ़ावा देते हैं तथा इसकी आड़ में देश को तोड़ने की अपनी राजनीति को अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं? आश्चर्य की बात ये है कि इसके बाद भी ये लोग कहते हैं कि इनकी राष्ट्रभक्ति पर शक न किया जाए?

मामला जम्मू कश्मीर के निकाय चुनाव का है जहाँ एक जगह मजहबी कट्टरपंथियों के फरमान के बाद एक भी वोट नहीं डाला गया. आपको बता दें कि निकाय चुनाव के दूसरे चरण में घाटी में मात्र 2.3 फीसदी ही वोट पड़े. श्रीनगर के छत्ताबल वार्ड में बुधवार को दूसरे चरण के मतदान के दौरान एक भी वोट नहीं पड़ा. इसके अलावा टंकीपोरा, सैयद अली अकबर वार्ड में आठ-आठ मतदाता ही पहुंचे. 19 वार्ड के लिए हुए चुनाव में नौ वार्ड में 100 से कम जबकि चार वार्ड में 150 से कम वोट पड़े. वहीं, लवायपोरा व जैनाकोटा में लंबी कतार थी. मूजगुंड में 4.5 व सोलिना में 6.3 प्रतिशत मतदान हुआ.

घाटी में निकाय चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में भले ही कम वोटिंग हुई, लेकिन इसमें एक बड़ा फर्क भी नजर आया. आतंकियों की धमकी और अलगाववादियों के बहिष्कार की घोषणा के बाद भी लोगों ने उन्हें जवाब दिया. श्रीनगर में अलगाववादियों के प्रभाव वाले सभी 19 वार्ड (जहां बुधवार को मतदान हुआ) में मतदाता घरों से बाहर निकले. आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग में बुर्का में पुरुष मतदाता वोट डालने पहुंचे. उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में जमकर वोट पड़े. श्रीनगर के बाहरी इलाके से लगते इस शिया बहुल इलाके में बूथों पर मतदाताओं की कतार थी.

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