ठीक ओवैसी की भाषा बोल गये कमलनाथ राष्ट्रगीत वन्देमातरम के मुद्दे पर

कभी गाय , गंगा , गीता आदि की बातें करने वालों को साम्प्रदायिक बताने वालों ने अब सीधे सीधे खुद को केन्द्रित कर रखा है राष्ट्रगीत वन्देमातरम के मुद्दे पर और हर सम्भव ये प्रयास किया जा रहा है कि भारत की आज़ादी के उन मतवालों की जुबान से निकले इस पावन गीत को कैसे साम्प्रदायिक बनाया जाय . इसकी कमान अभी हाल में ही मन्दिर जा कर और गौ माता के लिए अपने एजेंडे में जगह दे कर सत्ता में वापसी करने वाली कांग्रेस द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गये कमलनाथ के हाथो में दी गयी है .

यहाँ मुद्दा ये नहीं था कि जो वन्देमातरम नहीं गाते हैं वो क्या हैं , यहाँ पर मुद्दा ये था कि जो वन्देमातरम गा रहे हैं उनके साथ एक तुगलकी फरमान क्यों ? कमलनाथ ने एक वर्ग विशेष को खुश करने के लिए एक बयान दिया है कि क्या जो वन्देमातरम नही गाते हैं वो देशभक्त नहीं है . जबकि यहाँ सवाल ये था कि जो वन्देमातरम गा रहे हैं उन पर प्रतिबंध क्यों लगाए गये और उनको नये सरकारी आदेश जिसमे ये गाना गाने से मना किया गया है , उसको पालन करने के निर्देश क्यों मिले है .

सवाल कमलनाथ से ये भी बनता है कि क्या उनके हिसाब से वन्देमातरम ही सभी विवादों और विकास में बाधा की जड़ है ? लेकिन उनकी ये बयानबाजी असदुद्धीन ओवैसी की बयानबाजी की याद दिलाती है जिन्होंने ठीक यही सवाल किया था कि जो वन्देमातरम नहीं गाते क्या वो देशभक्त नहीं है ? इसके साथ ही कमलनाथ ने कहा, ”हमारा यह भी मानना है कि इस तरह के निर्णय वास्तविक विकास के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिये एवं जनता को गुमराह, भ्रमित करने के लिये थोपे जाते रहे हैं.  स बार कमलनाथ सरकार में साल के पहले दिन ही इसका पालन नहीं हो सका और इस तरह से 13 साल पुरानी परंपरा टूट गई.

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