वहां हर कोई कर रहा था “वन्देमातरम” का उद्घोष.. सिर्फ कांग्रेस के उस विधायक को छोड़ कर जिसने कहा – “मेरे लिए शरीयत सबसे पहले और सबसे बड़ी”

जहाँ एक तरफ राष्ट्र का चप्पा चप्पा गूँज रहा है भारत माता की जय और वन्देमातरम के उद्घोष से तो वहीँ कांग्रेस पार्टी ने भी अपनी पहली पंकित के नेताओं के द्वारा भारत की सेना को सर्जिकल स्ट्राइक की बधाई देते हुए पाकिस्तान की कैद में रह गये वायुसेना के विंग कमांडर के लिए भगवान से प्रार्थना की है तो वहीँ इसी कांग्रेस की दूसरी पंक्ति ने दिखाया है ऐसा रूप जो किसी ने सोचा भी नहीं रहा होगा . ऐसे समय पर इस प्रकार के बयान की आलोचना पूरा देश भले कर रहा पर खुद कांग्रेस नहीं .

ज्ञात हो कि भारत की फ़ौज द्वारा किये गये सर्जिकल स्ट्राइक के बाद एक स्थल जहाँ पर सभी जमा हो कर भारत माता की जय और वंदेमातरम् का उद्घोष कर रहे हैं  वहीँ पर कांग्रेस के विधायक ने दिखाया है ऐसा रूप जो किसी ने सोचा भी नहीं था .  ये विधायक कश्मीर या किसी अन्य स्थान के नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के हैं जिनको कई सेकुलर हिन्दुओ ने भी वोट दे कर जीत का सेहरा बांधा था और कमलनाथ ने भी इनके ऊपर काफी विश्वास किया है .. लेकिन अब जो देखने को मिला वो अजीब ही कहा जाएगा .

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद वंदे मातरम पर एक बार फिर सियासत गरमा सकती है, क्योंकि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने वंदे मातरम बोलने से मना कर दिया है। उन्होंने दलील देते हुए कहा कि शरीयत उन्हें वंदे मातरम बोलने की इजाजत नहीं देती.. भोपाल की मध्य विधानसभा सीट से MLA Arif Masood ने कहा कि उनकी बुनियादी लड़ाई शरीयत है और उसकी खातिर वह वंदे मातरम नहीं बोल सकते।

वे सीहोर जिले की श्यामपुर तहसील में आयोजित मेव समाज के राष्ट्रीय जलसा कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे, जहां पूर्व विधायक रमेश सक्सेना ने भारत माता की जय ओर वंदेमातरम के नारे लगवाए। इसके बाद जब विधायक आरिफ मसूद के संबोधन की बारी आई तो उन्होंने माइक संभालते ही कहा कि उनके विधायक ने भले ही नारे लगवाये हों, लेकिन वे वंदे मातरम नहीं बोल सकते, क्योंकि शरीयत उन्हें इसकी इजातत नहीं देती। उन्होंने कहा कि वह शरियत के साथ समझौता नहीं कर सकते।

 

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