हिन्दू देवताओं को अपशब्द बोलने वाले से हाथ मिलाने जा रहे वो जो खुद को बताते हैं संविधान निर्माता का वंशज

वो खुद को संविधान के निर्माता भीमराव रामजी आंबेडकर का वंशज बताते हैं तथा कहते हैं कि उनके पूर्वज ने संविधान की रचना की तो वह संविधान की रक्षा कर रहे हैं. संविधान निर्माता का वंशज होने का दावा करने वालों ने अब उनसे राजनैतिक गठजोड़ का फैसला लिया है जिसने न सिर्फ हिन्दू देवी देवताओं को अपशब्द कहे हैं बल्कि भारतमाता की जय न बोलने की भी कसम खाई है तथा कहा है कि अगर उसकी गर्दन पर चाकू रख दिया जाता है तो भी वह भारतमाता की जय नहीं बोलेगा. हम बात कर रहे हैं हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवेसी तथा महाराष्ट्र के दलित नेता प्रकाश आंबेडकर की जिन्होंने महराष्ट्र विधानसभा चुनाव तथा लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने का फैसला किया है

बता दें कि पिछले कुछ समय से देश में “दलित-मुस्लिम” तथा “जय भीम जय मीम” का नया नारा अस्तित्व में आया है तथा इसका मुख्य मकसद है भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करना. इससे नारे को साकार रूप देने के लिए प्रकाश अंबेडकर ने ओवैसी से हाथ मिलाया है. खबर के मुताबिक़, प्रकाश आंबेडकर की भारिपा बहुजन महासंघ और असदुद्दीन ओवैसी की एमआइएम ने शनिवार को लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ने का फैसला किया है. दोनों पार्टियों के गठबंधन का औपचारिक एलान दो अक्टूबर को होने वाली औरंगाबाद की रैली में किया जाएगा. औरंगाबाद से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुसलमीन (एआइएमआइएम) विधायक इम्तियाज जलील ने बताया कि नया गठबंधन दलितों, मुस्लिमों सहित अन्य पिछड़ा वर्ग के हितों की लड़ाई लड़ेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 70 सालों में इस समाज को सिर्फ एक वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया गया है लेकिन उनकी पार्टी तथा अंबेडकर की पार्टी ऐसा नहीं होने देगी.

गठबंधन के नेतृत्व पर जलील ने कहा कि ओवैसी ने पहले ही आंबेडकर से नेतृत्व करने की अपील की है तथा सीटों के बंटवारे पर उन्होंने अगले माह तस्वीर साफ होने की बात कही है. उन्होंने कहा कि उनका गठबंधन लगभग तय हो गया है. वहीं इस मामले पर कांग्रेस ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चव्हाण ने कहा है कि प्रकाश आंबेडकर को असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन की जल्दबाजी में नहीं पड़ना चाहिए. चव्हाण ने कहा कि भाजपा और शिवसेना से मुकाबले के लिए कांग्रेस और राकांपा समान विचारधारा वाले दलों के साथ महागठबंधन करना चाहती है. हम आंबेडकर को इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं। ऐसे में उन्हें ओवैसी की पार्टी से गठबंधन की जल्दबाजी में नहीं पड़ना चाहिए.

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *