आक्रान्ता अकबर के समय से बंद एक हिन्दू परंपरा अब योगी आदित्यनाथ ने शुरू कराई.. बीच में सब रहे थे खामोश

2019 का तीर्थराज प्रयागराज का दिव्य कुंभ कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है. पूरी दुनिया प्रयागराज में सनातनी सभ्यता तथा संस्कृति के न सिर्फ दिव्य दर्शन कर रही है बल्कि सनातन के आगे सर भी झुका रही है. इसी बीच प्रयागराज कुंभ से एक ऐसी खबर भी आ रही है जो साबित करती है कि योगी सरकार में किस तरह से सनातनी सभ्यता तथा परंपराओं को वास्तविक पटल पर पुनः निखारा जा रहा है.

खबर के मुताबिक़, प्रयागराज कुंभ मेले में एक बार पुनः प्रयागराज पंच-कोसी परिक्रमा की शुरुआत की गई है. साधु संतों का कहना है, कि ये धार्मिक परिक्रमा गंगा पूजन के बाद प्राचीन काल से ही होती रही है, लेकिन 550 साल पहले ये परिक्रमा मुगल आक्रान्ता अकबर ने बन्द करवा दी थी, जिसके बाद साधु संतों की मांग पर सरकार ने इस पंचकोसी परिक्रमा को फिर से शुरू किया है, गंगा पूजन के बाद अक्षयवट के दर्शन के बाद ये परिक्रमा शुरू होती है. गुरूवार से पुनः शुरू हुई इस परिक्रमा से पहले संगम तट पर साधु संतों और जिला प्रशासन के अधिकारियों ने परिक्रमा से पहले गंगा आरती की. विलुप्त हो रही प्रयागराज परिक्रमा को फिर से शुरु कराने का बीड़ा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने उठाया था.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखाड़ा परिषद की पहल पर प्रयागराज परिक्रमा का रूट तय किया गया, प्रयागराज पंचकोसी परिक्रमा के तहत प्रयागराज के प्राचीन तीर्थ स्थान की परिक्रमा की जाती है. परिक्रमा की शुरूआत पहले दिन गंगा पूजन के बाद अक्षयवट और सरस्वती कुंड का दर्शन करते हुए जल मार्ग द्वारा बनखंडी महादेव और तक्षक तीर्थ से मौज गिरी बाबा मंदिर में दर्शन करते हुए आगे बढ़ेगी. इसके बाद यहां से सूर्य टपकेश्वर महादेव मंदिर, चक्र माधव, गधा माधव के दर्शन के बाद गंगा पार क्षेत्र में मौजूद परणास ऋषि के आश्रम में स्थापित सोमेश्वर महादेव मंदिर का दर्शन करके पूरब दिशा में स्थित दुर्वासा ऋषि के आश्रम में प्रवेश करेगी. इसके बाद यह परिक्रमा शंख माधव के दर्शन के बाद पूरी हो जाएगी.

दूसरे दिन की परिक्रमा प्रयागराज के कोतवाल हनुमान जी के दर्शन से शुरू होगी. इसके बाद दत्तात्रेय मंदिर, चेतन पुरी, समाधि जूना अखाड़े के साथ उत्तर दिशा में मौजूद पांडेश्वर महादेव का दर्शन करने के बाद बक्शी बांध पर मौजूद नाग वासुकी मंदिर, दशा सुमेर मंदिर, बेनी माधव मंदिर का दर्शन पूजन करने के बाद पंच दशनाम जूना अखाड़े में भजन कीर्तन के बाद समाप्त हुआ करेगी. तीसरे और अंतिम दिन की पदयात्रा के लिए गंगाजल लेकर गंगा तट से निकलना होगा. शहर में स्थित भारद्वाज आश्रम में जाकर महर्षि भारद्वाज के अभिषेक के बाद परिक्रमा का समापन किया जा सकता है.

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