दिल्ली में शुरू हुआ अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन… राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया उद्घाटन

आर्य समाज द्वारा देश की राजधानी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर 10 में 4 दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 25 अक्टूबर को शुरू हो गया. अंतर्राष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन का उद्घाटन महामहिम राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने किया. सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में राष्ट्रपति कोविंद ने कानपुर में आर्य समाज के संस्थान में ली अपनी उच्च शिक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि अंधविश्वास, कुरीतियों और महिला सशक्तिकरण के साथ ही आधुनिक सोच के साथ शुरू हुए महर्षि दयानंद सरस्वती के महाअभियान को आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है.  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा सुदर्शन टीवी के चेयरमैन सुरेश चव्हाणके जी कल 27 अक्टूबर कार्यक्रम में शामिल होंगे.

भारत के महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए महर्षि दयानंद ने जो मंत्र दिए थे उन्हीं की राह पर चलकर देश आज बुलंदियों पर पहुंच रहा है, साथ ही आर्य समाज की यज्ञ और शांति पाठ की परिकल्पना पर्यावरण की समस्या को मिटाने में अहम भूमिका निभा सकता है. 19वीं सदी में ही महर्षि दयानंद ने महिला सशक्तिकरण पर बल देते हुए महिलाओं को पुरुषों के समान बताया था. आज महिलाओं की आजादी के लिए हो रहे तमाम आंदोलनों को प्रेरणा महर्षि दयानंद जी के आंदोलन से ही मिली है. राष्ट्रपति कोविंद ने आर्य समाज को आधुनिक दौर का सबसे प्रासंगिक संगठन बताते हुए कहा कि पंथ, संप्रदाय, जाति-पाति जैसे बंधनों से मुक्त कर आर्य समाज मानव जाति को आर्य यानी श्रेष्ठ बनाने में सक्रिय है.

राष्ट्रपति कोविंद ने बताया कि महर्षि अरविंद जी ने कहा था – ” स्वामी दयानंद सरस्वती मनुष्यों व संस्थाओं के मूर्तिकार हैं. दयानंद सामाजिक एवं आध्यात्मिक सुधार के निर्भीक योद्धा थे. उनके जीवन से प्रभावित होकर स्वामी आत्मानन्द जी , महात्मा हंसराज जी , पण्डित गुरूदत्त विद्यार्थी , स्वामी श्रद्धानंद जी , लाला लाजपत राय जैसे अनेक क्रांतिकारियों ने क्रांति मार्ग में अपना जीवन  समर्पित किया. 19वीं सदी म़े महर्षि दयानंद ने अस्पृश्यता निवारण , महिला सशक्तिकरण , समानशिक्षा व्यवस्था , जाति उन्मूलन , पर्यावरण संरक्षण आदि अनेक समस्याओं का समाधान दिया जो आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक बना हुआ है.  वेदमंत्र धर्म और संप्रदाय से उपर उठकर मानवता के लिए एक आह्वान है. अपने हृदय के उद्गार प्रकट करते हुए राष्ट्रपति ने बताया -कानपुर के एक आर्य संस्थान में उन्होंने पांच वर्ष तक शिक्षा ग्रहण की. उनके माता पिता का आर्य समाज से गहरा संबंध रहा. आर्यसमाज सम्पूर्ण विश्व को एक सार्थक गति दे सकता है.

इससे पहले राष्ट्रपति कोविंद के उद्घाटन भाषण के बाद स्वागत समिति के अध्यक्ष एमडीएच के महाशय धर्मपाल ने राष्ट्रपति की एक तस्वीर और स्मृति चिन्ह उन्हें भेंट किया. चार दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन राष्ट्रपति के साथ ही केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन, सत्यपाल सिंह, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के सुरेश चंद्र आर्य ने भी संबोधित किया. इस महासम्मेलन में 32 देशों से आए आर्य समाज के लाखों प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय आर्य महासम्मेलन 28 अक्टूबर तक चलेगा. आख़िरी दिन 28 अक्टूबर को गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह आर्य महासम्मेलन का समापन करेंगे.

केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री डाॅ. हर्षवर्धन ने अपने प्रेरक विचारों से अवगत कराते हुए कहा कि महर्षि दयानन्द ने जात-पात, भेद-भाव का जो विरोध किया उससे वे सर्वाधिक प्रभावित हुए, जो आज भी प्रासंगिक है. इससे पहले उद्घाटन कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ गंधर्व महाविद्यालय की छात्राओं के समूह द्वारा सुमधुर संगीत से हुआ. नगर संचालक सीएम अभिषेक बंसल ने बताया कि यह महासम्मेलन 6 वर्ष बाद पुन: भारत में आयोजित हो रहा है, इससे पहले 2017 में म्यांमार, 2016 में नेपाल, 2015 में ऑस्ट्रेलिया, 2014 में सिंगापुर, 2013 में दक्षिण अफ्रीका, 2012 में दिल्ली में आयोजित हुआ था. बता दें कि आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद जी ने की थी जिन्होंने धर्म की आड़ में अन्धविश्वास तथा कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाया था तथा सनातन विरोधी ताकतों से संघर्ष किया था.

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