21 जुलाई – जन्म दिवस पर नमन है कश्मीर में बर्फ का तूफ़ान अपनी छाती पर झेल कर अमर हो गये संदीप कुमार को

घर में एक माँ भर थी , पर वो सरहद पर था . उसकी पहली माँ शायद भारत माँ थी .. पीछे से पत्थर थे , सामने से गोलियां थी .. आसमान से बर्फ थी , फिर भी उसके कदम टस से मस नहीं होते थे … वो वीर योद्धा महज 28 साल का था , वो आयु जिसमे दुनिया के तमाम लोग रंगीन ख्वाब देखते हैं और गाड़ी , बंगले आदि के लिए कहीं ना कहीं संघर्ष कर रहे होते हैं .. ठीक उसी समय इस भारत माँ के लिए कोई बंदूक उठा कर आंखों में दुश्मन के खिलाफ अंगारे भर के देश की सरहदों की रखवाली करता हो तो उसके लिए बिना किसी स्वार्थ और सोच के सर अपने आप खुद ही झुक जाता है …

संदीप कुमार का जन्म स्थल था कर्नाटक के हासन जिले में .. इनका जन्म आज ही के दिन अर्थात 21 जुलाई सन 1989 को हुआ था . बचनप से ही देश की सेवा का जज्बा था मन में सो वर्दी को देख कर ही मन मचल जाता था … उन्हें सन 1971 , सन 1962 युद्ध के वीरों के नाम पूरी तरह से याद थे , तब किसी को नहीं पता था की उन्ही वीरों की लिस्ट में कभी उनका भी नाम आ जाएगा .. हर संभव कोशिश कर के सेना में भर्ती हुए थे संदीप कुमार और जब उन्हें संसार के सबसे दुर्गम युद्ध क्षेत्र कश्मीर में ड्यूटी मिली तो वो इसलिए खुश हुए क्योंकि उस स्थान पर दुश्मनो के नाश के सपने उन्होंने बचपन से पाल रखे थे ..

संदीप कुमार ने कई साहसिक अभियानों में भाग लिया . उनकी चपलता और शक्ति की उनकी बटालियन में काफी चर्चा होती थी .. अपने गांव में आ कर वो लोगों को कश्मीर के हालत बताते थे , वो असली हालत जिसे अक्सर भारत के तमाम सफेदपोश केवल वोट बैंक के लिए छिपाते रहते हैं .. इसी वर्ष 25 जनवरी में ख़राब मौसन की पूर्व चेतावनी जारी थी पर इन्होने अपने पोस्ट को छोड़ना गंवारा नहीं समझा और अपनी ड्यूटी पर अड़े रहे क्योंकि वो स्थान घुसपैठ के लिए जाना जाता था .. एक बहुत बड़ा बर्फीला तूफ़ान आया और अपने साथ 15 वीरों की जान ले गया .. उनमे से एक थे महानायक संदीप कुमार .. वीरता की पराकाष्ठा ये थी की जवानो के शरीर भले ही बर्फ से अकड़ गए थे पर उनकी उँगलियाँ उनकी बंदूकों के ट्रिगर से ज्यों की त्यों सटी थी ,, जैसे किसी भी हालत से लड़ने को तैयार हों ..

ये संदीप कुमार उसी कर्नाटक प्रदेश से थे जिसका मुख्यमंत्री सिद्धारमैया जा एक ही भारत में २ अलग अलग झंडे मांग रहा है . इस वीर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपट कर आया था जिसने पूरे कर्नाटक को एक सूत्र में पिरो कर रख दिया था .. इस वीर ने अपने प्राणो का बलिदान भी केवल इसीलिए किया कश्मीर में जिस से वहां दो झंडे का चलन बंद हो जाए और वो भी भारत के तिरंगे को पूरी तरह से आत्मसात कर ले .. लेकिन यकीनन कांग्रेस के कुकृत्य से इस महावीर की आत्मा को पीड़ा जरूर हुयी होगी जब उसी के जन्म स्थल कर्नाटक में ही कांग्रेस ने दो झंडे की मांग की थी …  

आज 21 जुलाई को सुदर्शन न्यूज वीरता और शौर्य की पराकाष्ठा दिखा कर अमर हो गए अमर बलिदानी संदीप कुमार को उनके जन्म दिवस पर बारम्बार नमन , वंदन और अभिनन्दन कर रहा है …. आप के शौर्य के ही दम पर ये भारत की नीव टिकी है वीरों …… जय हिन्द की सेना …. 

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