अमेरिका की शिक्षिका रेबिका पोलार्ड भारत आई और कुरुक्षेत्र में रम कर रह गई.. भगवा को विश्व का सम्मान

यहाँ आकर मुझे ऐसा लग रहा है जैसे स्वर्ग में आ गई. कुरुक्षेत्र की हवा मे पता नहीं ऐसी क्या ताकत है कि यहां प्रवेश करते ही दिल को ऐसा चैन मिला कि मन बिलकुल शांत और धार्मिक हो गया, यहां से वापस जाने का मन ही नहीं करता. यहां की मिट्टी में कुछ तो ख़ास है जो मुझे अपनी ओर खींचे ही जा रही है. अध्यात्म के ऐसे केंद्र को मैं दिल से सैल्यूट करती हूं. यह कहना है अमेरिका की शिक्षिका और टूर ऑपरेटर रेबिका पोलार्ड का.

आपको बता दें कि अमेरिका की शिक्षिका रेबिका पोलार्ड भारत भ्रमण पर आई हुईं है. हरियाणा के कुरुक्षेत्र निवासी अनुराग अत्री और अर्चना अत्री के अनुरोध पर रेबिका कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए पहुंची. बृहस्पतिवार को रेबिका पोलार्ड केडीबी कार्यालय पहुंची. यहां पहुंचने पर पिहोवा के एसडीएम निर्मल नागर ने उनका स्वागत किया और कुरुक्षेत्र के इतिहास पर आधारित पुस्तक भेंट की. एसडीएम ने रेबिका को ब्रह्मसरोवर के इतिहास और कुरुक्षेत्र के इतिहास के बारे मे विस्तार से बताया. वहीं 7 से 10 फरवरी तक पिहोवा में आयोजित होने वाले सरस्वती महोत्सव में आमंत्रित किया. एसडीएम निर्मल नागर ने अनुराग अत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि विदेशी लोगों को कुरुक्षेत्र से जोड़ने में अनुराग अत्री अहम रोल अदा कर रहे हैं.

बृहस्पतिवार को जैसे ही रेबिका पोलार्ड ब्रह्मसरोवर पर पहुंची तो वॉव वंडरफुल सरोवर कहने से न रह सकी. विशाल ब्रह्मसरोवर को देखकर रेबिका पोबार्ड ने ब्रह्मसरोवर के बारे हर बात को गहराई से समझा. उन्होने आरती स्थल और श्री कृष्ण अर्जुन रथ की भी सराहना की तथा शीश नवाया. ब्रह्मसरोवर की पवित्रता को जानकर पानी हाथों और मुंह पर लगाया. अनुराग अत्री ने बताया कि रेबिका पोलार्ड प्रत्येक वर्ष अमेरिका से तकरीबन सौ पर्यटकों को भारत में भ्रमण के लिए लेकर आती हैं. अब तक वे जयपुर या बनारस में ही पर्यटकों को लेकर जाती रही हैं.

अनुराग अत्री ने बताया कि वे अमेरिकन पर्यटकों को कुरुक्षेत्र में लेकर आएं इसके लिए उन्होंने रेबिका पोलार्ड को कुरुक्षेत्र भ्रमण के लिए बुलाया है. ज्योतिसर में महाभारत कालीन वट वृक्ष के बारे में जब रेबिका पोलार्ड को बताया गया कि यह वृक्ष पांच हजार वर्ष से भी पुराना है तो रेबिका पोलार्ड ने उत्साहित होते हुए कहा कि भारत का इतिहास अपने में बहुत कुछ समेटे हुए है जबकि अमेरिका का इतिहास तो मात्र 250 वर्ष पुराना है. रेबिका पोलार्ड ने बताया   कि भारत की सभ्यता तथा संस्कृति को देखकर, समझकर ऐसा लगता है कि इसी में रम जाएँ. रेबिका पोलार्ड के साथ बातचीत में अनुराग अत्री ने बताया कि 2 फरवरी को साउथ अफ्रिका के आध्यात्मिक गुरु जो. जेम्स भी कुरुक्षेत्र में पहुंच रहे हैं. वे यहां पर योगा व अध्यात्म के बारे जानेंगे.

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