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अयोध्या में अनशन करते संत का मोदी को चैलेंज… पूरा देश जानना चाह रहा- “क्या स्वीकार होगी ये चुनौती?”

अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का वादा करके सत्ता में आयी मोदी सरकार द्वारा अभी तक इस वादे को पूरा न किये जाने को लेकर अब संत समाज आंदोलित नजर आ रहा है. न सिर्फ संत समाज बल्कि आम जनता भी इस मुद्दे को लेकर मुखर है तथा अयोध्या में श्रीराम मंदिर की मांग कर रही है.  श्रीराम मन्दिर निर्माण को लेकर विगत 1 अक्टूबर से आमरण अनशन पर बैठे तपस्वी छावनी के महन्त परमहंस दास ने प्रधानमन्त्री श्री नरेंद्र मोदी जी को एक चुनौती दी है तथा उनकी इस चुनौती का पूरे देश ने समर्थन किया है. संत परमहंस दास की प्रधानमन्त्री मोदी जी को चुनौती के बाद देश इस बात का इन्तजार कर रहा है कि क्या मोदी जी इस चुनौती को स्वीकार  करेंगे.

संत परमहंस दास ने मोदी जी को चुनौती देते हुए कहा है कि प्रधानमन्त्री मोदी अयोध्या आकर रामलला के दर्शन करें और अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो वह अनशन करते हुए प्राण त्याग देंगे. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी देश के कोने-कोने में जा रहे हैं. विदेशों की तमाम यात्राएं कर रहे हैं. यहां तक कि मस्जिदों में भी जा रहे हैं. वह सर्वोच्च पद पर हैं उन्हें सब जगहों पर जाना चाहिए. सबका सम्मान, सबका विकास हो यह अच्छी बात है. लेकिन मुझे एतराज इस बात पर है कि राममन्दिर के नाम पर पूर्ण बहुमत से बीजेपी सरकार केन्द्र आयी और उत्तर प्रदेश में भी है. मोदी सब जगह जा रहे हैं लेकिन रामलला का दर्शन करने क्यों नही आ रहे हैं, तो क्या पीएम मोदी के दर्शन करने मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है?

महन्त परमहंस दास ने कहाकि आज मेयर से लेकर राष्ट्रपति तक सभी भाजपा के हैं और वह सब जय श्री राम बोल रहे हैं. एक बार नरेंद्र मोदी आकर प्रभु श्रीराम को देख लें तो उन्हें पता चल जायेगा कि पूरे विश्व में गरीब से गरीब व्यक्ति की कुटिया वैसी नही होगी, जितने दयनीय में हमारे प्रभु रामलला रह रहे हैं. परमहंस दास ने कहा कि प्रधानमंत्री एकबार अयोध्या आकर अपने आंख से रामलला को देख लें. जिस राममन्दिर के नाम पर भाजपा सरकार पूर्ण बहुमत से केन्द्र में है वो आखिर रामलला की सुध क्यों नहीं ले रही है. आखिर हमारे रामलला कैसे हैं, एक बार आकर वह भगवान राम का दर्शन कर लेते हैं तो अनशन तोड़ दूंगा. मुझे विश्वास हो जायेगा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सब देख लिया. उन्हें कुछ बताने की जरूरत नही होगी.

अनशन के तीसरे दिन महन्त परमहंस से मिलने पहुंचे विहिप अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय ने कहा कि संत का अनशन एक पवित्र कार्य के लिए है. देश को अयोध्या के इस तर्पण को महसूस करना चाहिए. आतंकियों के लिए यदि रात्रि के समय अदालतें खुल सकती हैं तो अयोध्या मसले को लटकाने की जरूरत क्यों? राष्ट्रपति और केन्द्र सरकार को रामजन्मभूमि मसले को गम्भीरता से लेना चाहिए. अयोध्या मसले को जल्द निपटाने के लिए सप्ताह में तीन दिन सुनवाई हो, जिससे दो महीने के अन्दर मसला हल हो सके. राममन्दिर मामले को जल्दी निपटाना विश्व शांति के लिए आवश्यक है. मामले को लम्बा खींचना देश हित में नही है.

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