चीन को पछाड़ने वाली है भारत की आबादी. ये वो आबादी है जिसमे अवैध बंगलादेशी, रोहिंग्या की गिनती शामिल नहीं

जिस आने वाली समस्या को ले कर राष्ट्र निर्माण संस्था के अध्यक्ष श्री सुरेश चव्हाणके जी ने पूरे भारत में घूम घूम कर लोगों को जागरूक किया था और आंकड़ों के साथ वो आने वाला सत्य बताया था आख़िरकार वो समस्या सतह पर आती दिख भी रही है . ध्यान देने योग्य है कि सरकारी आंकड़ो में ही भारत जल्द ही चीन को आबादी के मामले में पीछे करने वाला है . ये वो संख्या है जिसमे अवैध घुसपैठिये शामिल नहीं है जिसमे करोड़ों की संख्या में बंगलादेशी और लाखों की संख्या में रोहिंग्या शामिल है . ये वो चुनौती है जो आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बड़ी समस्या बनने वाली है .

यहाँ पर ध्यान देने योग्य है कि एक ही पक्ष की बेतहाशा बढ़ रही आबादी से जूझ रहे भारत से क्षेत्रफल में काफी बड़ा चीन जो फिलहाल वर्तमान समय में दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में स्थापित है, वो चीन अब जल्द ही भारत द्वारा पिछड़ने की कगार पर आ चुका है . बढती आबादी के खतरे से सतर्क चीन ने तमाम ऐसे कदम उठा लिए हैं जिसके चलते वहां पर जनसंख्या की विकास दर बेहद धीमी हो गई है। अगर आकड़ों पर गौर करें तो चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार नियोजन आयोग द्वारा अभी जल्द ही जारी की गयी एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट के अनुसार वर्ष, 2018 के पहले आठ महीनों में चीन की शुद्ध जनसंख्या वृद्धि एक ही समय अवधि के दौरान भारत के 14 मिलियन (140 लाख) की तुलना में केवल 4.1 मिलियन (41 लाख) थी। इसी अख़बार द्वारा पेश किये गये आंकड़ों के अन्सुअर पिछले साल चीन में करीब 17 मिलियन (170 लाख) बच्चे पैदा हुए थे, जो देश की बुढ़ापे की आबादी को समाप्त करने के लिए आवश्यक 20 मिलियन (200 लाख) जन्म से कम है।

एशिया टाइम्स नामक समाचार एजेंसी के अनुसार 9 सितंबर, 2018 तक भारत की कुल जनसंख्या 1.336 बिलियन (1.336 अरब) है, जो धीरे-धीरे चीन के 1.339 बिलियन (1.339 अरब) तक पहुंच सकती है।. कई संकटों से जूझने वाले चीन ने सबसे पहले अपनी आबादी की दर को सीमित किया और बीजिंग के अधिकारियों ने 2016 में एक बेहद कड़ा फैसला लेते हुए चीन में “एक-बच्चे” नीति बनाया, जिसमें जोड़े के लिए सिर्फ दो बच्चे हो सकते थे। इस कानून का छुटपुट विरोध जरूर हुआ लेकिन चीन की सरकार अपने फैसले पर अडिग रही थी . 1970 के दशक के अंत में चीनी बच्चों के लिए पहली बार एक बच्चे की नीति पेश की गई थी, इस बात के बीच कि एक उभरती आबादी देश की अर्थव्यवस्था और भूगोल को खत्म कर देगी।

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