चीन, अरब और पाकिस्तान की मीडिया में उठता दर्द बता रहा है की नक्सलियों पर वार की चोट कहाँ तक हुई है

ये पहला मामला नहीं है जब प्रधानमंत्री या किसी अतिविशिष्ट की हत्या की साजिश में कोई गिरफ्तार हुआ हो . इस से पहले भी तमाम को ऐसे मामलों में उठा कर मौत से भी बदतर प्रताड़ना दी गयी है जिसमे उनका कहीं भी कोई भी रोल नहीं था . साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की टूटी हुई रीढ़ और कर्नल श्रीकांत पुरोहित की खिसकी हुई टखने की हड्डी आज तक गवाही दे रही है सत्ता के दुरूपयोग की . उस समय विदेशी तो दूर , देश की मीडिया ने भी साध्वी प्रज्ञा को हत्यारन और डायन जैसे शब्दों से सम्बोधित करते हुए हूजी जैसे इस्लामिक संगठन को अकेले अपने दम पर खत्म करने वाले कर्नल पुरोहित को आतंकी जैसे शब्द से सम्बोधित किया था .

उन 5 वर्षो की प्रताड़ना का आज तक कोई हिसाब नहीं है . खुद साध्वी प्रज्ञा के पिता ने मानवाधिकार आयोग में न जाने कितने आवेदन किये लेकिन किसी एक में भी उनको उत्तर नहीं मिला . वही मानवाधिकार आज स्वतः नोटिस ले रहा है और देश की मीडिया तो दूर विदेश में बैठी तमाम सख्सियत और मीडिया के वर्ग इस मामले को इस कदर उठा रहे हैं जैसे उनके पास पुलिस से ज्यादा प्रमाणिक सबूत हों. जिस प्रकार से एक विचारधारा ने कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा की उसी प्रदेश की पुलिस द्वारा गिरफ्तारी को एक न्याय संगत और जरूरी कार्य बताया था उन्ही वामपंथियों के द्वारा कथित रूप से इन दुर्दांत नक्सलियों के समर्थको की गिरफ्तारी पर हल्ला मचाना कहीं न कहीं से जनता के गले नहीं उतर रहा है .

ज्ञात हो कि अनतर्राष्ट्रीय मोर्चों पर हमेशा भारत के विरोध में खड़े रहने वाले देशो में सबसे आगे चीन , खाड़ी देश और पाकिस्तान होते हैं और भारत में नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचते हुए गिरफ्तार हुए नक्सलियों के आकाओं की गिरफ्तारी पर सबसे ज्यादा वही बोल रहे हैं . यद्द्पि इस से पहले भी जब भी कोई विवादास्पद मुद्दा भारत में तेज होता है, उसकी धमक विदेशी मीडिया में भी देखने को मिलती है. लेकिन मराठो के मुद्दे से सीधे मोदी की हत्या की साजिश रचने वालों की गिरफ्तारी पर जिस अंदाज़ में चीन , खाड़ी देशो और पाकिस्तान में मीडिया द्वारा आंसू बहाये जा रहे हैं उस से साफ़ पता चलता है कि उनका लगाव किस से था ?

इसी मामले में अभी भी डोकलाम मुद्दे को हवा देने वाले चीनी अख़बार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भीमा कोरेगांव मामले में गिरफ्तारी पर प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के बयान को काफी महत्व दिया है. कांग्रेस के बयान को छापते हुए साउथ चाइना पोस्ट लिख रहा है कि मोदी सरकार अपने विरोधियों को जेल में डालने का काम कर रही है. इसी मुद्दे पर भारत की सरकार और भारत की सेना के खिलाफ आये दिन बयान छापने वाले पाकिस्तानी अखबार डॉन ने भारत में हुई कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की खबर में वामपंथी विचारधारा वाली लेखिका अरुंधति रॉय के बयान को खास तवज्जो दिया है. यद्द्पि पाकिस्तान में खुद वामपंथी मात्र १ सीट जीत पाए हैं . इसी मुद्दे पर वामपंथ शून्य खाड़ी देशो के मुख्य समाचार माध्यम अल जजीरा ने लिखा है कि भारतीय पुलिस ने वामपंथी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रतिबंधित माओवादी संगठन से संबंधों के चलते गिरफ्तार किया गया है. इन गिरफ्तारियों का विरोध पूरे देश में देखने को मिल रहा है, वहीं कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने गिरफ्तारी की निंदा की है.

यद्द्पि जनता में किसी भी प्रकार की हलचल देखने को नहीं मिल रही है और सब चाह रहे हैं कि कानून अपना कार्य करे . कानून सबसे ऊपर रहने का नारा लगाने वालों को अचानक ही कानून से विश्वास सा क्यों उठने लगा है ये विचार का विषय है . अब तक देश की जनता को हत्यारे गौ रक्षक और मोब लॉन्चर के नाम से बदनाम करने वालों ने एक बार फिर से असहिष्णुणता का राग अलापना शुरू कर दिया है . यादपि पुलिस अभी भी इस बात पर कायम है कि उसके पास पर्याप्त सबूत हैं और उसने सारे प्रमाण के आधार पर ही ये गिरफ्तारियां की हैं . लेकिन यहाँ कोशिश चल रही है कि उनकी आवाज को इतना ऊपर कर दिया जाय जिसमे सच का शोर दब जाए … सवाल ये भी है कि अब तक अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर केवल और केवल हिन्दुओ का विरोध करने और हिन्दू देवी देवताओं को अपमानित करने वालों को अब किस आज़ादी के तहत भारत की जनता द्वारा चुने गए प्रधानमंत्री की हत्या की छूट चाहिए ?

Share This Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *