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आतंकियों के साथ खड़े होना धर्मनिरपेक्षता लेकिन देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ उद्योगपतियों के बगल खड़े होने पर हंगामा. क्यों देनी पड़ी मोदी को सफाई ?

ये समय भी कसा जा रहा है न जाने किस पैमाने पर . इसको किस प्रकार से लिया जा सकता है धर्मनिरपेक्षता के रूप में ये सोचने और समझने का विषय है .. पाकिस्तान में जा कर भारत के विरोध में बोलना , अपने देश के प्रधानमंत्री को हटाने के लिए उनकी मदद मांगना, चीन से युद्ध जैसे हालत में चीनी राजदूत के साथ खड़े रहना , दुर्दांत आतंकियों के साथ बैठ कर चाय नाश्ता करना और कश्मीर को अलग मांगने वालों के साथ गुलछर्रे उड़ाना .. ये किस प्रकार से सही माना जा सकता है लेकिन भारत में इसको खुद से रचे गए सेकुलरिज्म के नाम पर एकदम सही और सटीक ठहराया गया है . 

उधर भारत के प्रधानमंत्री को सफाई देनी पड़ी है और कहना पड़ा है की उद्योगपतियों के साथ खड़े होना किसी प्रकार का कोई अपराध नहीं है . ये व्है उद्योगपति है जिनके चलते भारत में रोज़गार मिल रहे हैं . आज सरकारी नौकरी से कहीं ज्यादा जिस प्राइवेट नौकरियों की तरफ युवा भाग रहे हैं उसमे से ज्यादातर इन्ही उद्योगपतियों द्वारा खड़ी की गयी कम्पनियाँ है . कुछ ऐसे राजनेता भी है जिनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत से अब तक सिर्फ और सिर्फ इन्ही उद्योगपतियों को गाली देने और उन्हें अपमानित करने के साथ साथ देशद्रोही ठहराने में बीत गयी है .. हैरानी की बात ये है की खुद प्राइवेट नौकरी करने वाले कुछ लोग ऐसे लोगों की बातों में आ भी गए थे . यहाँ ध्यान देने योग्य ये भी है की इन नेताओं के मुँह से आज तक कभी भी आतंकियों , अलगाववादियों , पत्थरबाजों आदि के खिलाफ एक भी शब्द नहीं निकला है . 

विदित हो की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ प्रवास के दौरान 60,000 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की नींव रखी. उन्होंने शिला पर हस्ताक्षर कर योजनाओं की शिला रखी. इस दौरान उन्होंने सरकार की उपलब्धियां बताने के साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से पुरानी सरकारों पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि पहले उद्योगपतियों को कुछ लोगों के सामने झुकना पड़ता था. वो कभी उद्योगपतियों के साथ फोटो नहीं खिंचाते थे. उन्हें डर लगता था क्योंकि उनकी नियत साफ़ नहीं थी. कभी समाजवादी पार्टी का अहम हिस्सा रहे अमर सिंह का नाम लेकर कहा कि ये जानते हैं कि क्या होता था. हम साथ खड़े होते हैं. हम उद्योगपति को अगर चोर लुटेरा कहेंगे तो ये कौन सा तरीका है. हां, जो गलत करेगा, उसे देश छोड़ कर भागना पड़ेगा. यहाँ ये ध्यान देने योग्य है की अधिकतर राजनेताओं ने अपने खुद के भी उद्योग धंधे लगा रखे हैं फिर भी जिस प्रकार से देश के प्रमुख उद्योगपतियों के खिलाफ कुछ नेताओं ने मात्र राजनैतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिए बयानबाजी की है उसको किसी भी रूप में सही नहीं माना जा सकता है . 

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