बलिदान दिवस विशेषांक- चमचमा रहे हैं मुगलों के मकबरे लेकिन इस हाल में है राणा सांगा की समाधि.. देख कर आ जायेगा रोना

अगर आप भारत को लूटने और नरसंहार करने आये मुगलों के मकबरे देखेंगे और उसके बाद भारत की रक्षा 80 घाव लगने के बाद भी करने वाले राणा सांगा की समाधि देखेंगे तो यकीनन एक देशभक्त को रोना आ जायेगा.. इतनी बुरी दुर्दशा एक हिन्दू महायोद्धा की समाधि की होगी किसी ने सोचा भी नही रहा होगा ..अफसोस कि बात ये है कि हिन्दू के हित व मुस्लिमों के हित दोनों की बातें करने वाली सरकारें आई और गईं पर इसमें से किसी ने भी बाबर के उस सबसे बक्से शत्रु की जीर्ण शीर्ण समाधि की तरफ नजर भी नही की.. हाँ, बाबरी मस्जिद का नाम ले कर अदालत तक मे खड़े होने वालों की संख्या अनगिनत है जो भारत का भविष्य दिखाती है..

बाबर के ऊपर मौत बन कर टूटे और हिंदुत्व की रक्षा के लिए 80 घाव खा कर भी अंतिम सांस तक लड़ते रहने वाले महायोद्धा राणा सांगा की ये दुर्दशा केवल सुदर्शन न्यूज़ आप को दिखायेगा . चन्द्रशेखर आज़ाद की दाह स्थली की दुर्गति दिखाने के बाद अब ये स्थान भी आपको देखना जरूरी है जिस से पिछली और वर्तमान दोनों सरकारों की सच्चे वीरों के लिए उदासीनता और विधर्मियों के प्रति उनकी नरमी ये दुनिया और आम जनमानस देख सके . ये वो लक्षण हैं जो निश्चित तौर पर भारत के चमकते इतिहास में काले धब्बे की तरह बने रहेगे और अफ़सोस की बात ये है कि किसी तथाकथित सेकुलर का राष्ट्रवाद इन स्मारकों की दुर्दशा पर नहीं जागता है .

खैर महायोद्धा राणा सांगा का नाम तो आपने जरूर सुना होगा।जी हाँ वो ही वीर योद्धा जिसने दिल्ली, गुजरात, व मालवा मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य की बहादुरी से ऱक्षा की। उस समय के वह सबसे शक्तिशाली हिन्दू राजा थे।राणा रायमल के बाद सन १५०९ में राणा सांगा मेवाड़ के उत्तराधिकारी बने।इनके शासनकाल मे मेवाड़ अपनी समृद्धि की सर्वोच्च ऊँचाई पर था। एक आदर्श राजा की तरह इन्होंने अपने राज्य की ‍रक्षा तथा उन्नति की।

राणा सांगा अदम्य साहसी थे। एक भुजा, एक आँख खोने व अनगिनत ज़ख्मों के बावजूद उन्होंने अपना महान पराक्रम नहीं खोया, सुलतान मोहम्मद शासक माण्डु को युद्ध मे हराने व बन्दी बनाने के बाद उन्हें उनका राज्य पुनः उदारता के साथ सौंप दिया, यह उनकी बहादुरी को दर्शाता है। चित्र में दिखाई दे रही ये जगह असल में महाराणा सांगा की समाधि हैं।यह समाधि राजस्थान के दौसा जिले के बसवा गाँव में रेलवे लाइन के एक तरफ मौजूद हैं।
चित्र को देखकर ही समझा जा सकता हैं की हम अपने वीरों का कितना सम्मान करते हैं।जिन्होंने इस देश की रक्षा के लिए अपनी जान दी आज हम लोगो ने उनका क्या हाल कर दिया।भले ही दुश्मन उनका सर ना झुका सके लेकिन हम लोगो ने उनकी शान जरूर मिट्टी में मिला दी। हमारी मांग है राष्ट्रवाद के नाम पर सत्ता के सिंहासन पर बैठे उन तमाम लोगों से कि अविलम्ब इस पावन स्थली का जीर्णोद्धार करवा कर इसको नवीनीकरण का स्वरूप दिया जाय जिस से आने वाली पीढ़ी राणा सांगा जैसे महावीरो का इतिहास पढ़ सकें बजाय कि विधर्मी , क्रूर लुटेरे बाबर जैसे आक्रान्ताओं का .

 

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