कुंभ स्पेशल- जूना अखाड़े ने बिजली का काम दे रखा है “मुल्ला महमूद” को.. वो संतों के बीच ही रह कर पढ़ता है 5 वक्त की नमाज़

यद्द्पि कुंभ धर्म और आस्थावान लोगों का पर्व है.ये वो पर्व है जहां पर करोड़ो हिन्दू अपनी धार्मिक मान्यताओं को पूरा करने के लिए वर्षों तक प्रतीक्षा किया करते हैं.. हर तरफ भगवा वस्त्र वाले साधु सन्यासियों के बीच हरे राम हरे कृष्ण की गूंज सुनाई देती है.. इस धर्मिक पर्व को रक्त रंजित करने की तमाम दुस्साहिक कोशिश भी की जाती रही है ..उदाहरण के लिए अभी हाल में ही मुंबई ATS द्वारा पकड़े गए कुछ आतंकियों ने अपने मंसूबे जाहिर भी किये थे जिसमें एक नाबालिग और एक मदरसा शिक्षक भी शामिल था .. लेकिन धर्म की इस नगरी में अब दिखने लगी है धर्मनिरपेक्षता..

ज्ञात हो कि हिन्दू साधु सन्तो में धर्मनिरपेक्षता का पूरा प्रभाव फैला है जो कुंभ में भी दिखाई दे रहा है..कभी अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि के खिलाफ मुकदमा लड़ रहे मुस्लिम व्यक्ति को खुद अयोध्या के सन्त अपनी कार से अदालत ले जाते थे और उनकी मौत लर फूट फूट कर रोया करते थे तो अब हिंदुओं के सबसे बड़े अखाड़े जूना अखाड़े के संतों की धर्मनिरपेक्षता का एक और ऐसा उदाहरण सामने आया है जो बताएगा कि ये कुंभ धार्मिकता के बजाय धर्मनिरपेक्षता के लिए ज्यादा जाना जाएगा ..यहां पर जूना अखाड़े के सन्तो के बगल ही एक मुस्लिम 5 वक्त की नमाज़ पढ़ता है और अल्लाह को याद करता है ..जूना अखाड़े के सचिव महंत हरि गिरि, महंत प्रेम गिरी और अखाड़े के मेला प्रभारी विद्यानंद सरस्वती से उनका गहरा लगाव है। इन्हीं के जरिए उन्हें काम मिलता है। आस्था की नगरी में मुजफ्फरनगर से आए मुल्ला महमूद पांच वक्त का नमाज पढ़ते हैं। नमाज़ पढ़ने से कोई नहीं रोकता है। इस दौरान किसी प्रकार कोई दिक्कत नहीं होती है।

कुंभ में आने वालों को ‘मुल्ला जी लाइट वाले’ का बोर्ड देखने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यहां आने वाले साधुओं के लिए वह बेहद खास हैं। मुल्ला 13 अखाड़ों में सबसे बड़े जूना अखाड़े को पिछले 11 वर्षों से रौशन करते आ रहे हैं। प्रयाग में मुल्ली का ये चौथा कुंभ है। जूना अखाड़े वालों ने अपना बिजली से जुड़ा तमाम काम मुल्ला को सौंप रखा है.उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर जिले के रहने वाले 77 वर्षीय मुल्ला महमूद पिछले तीन दशक से कोई भी कुंभ या अर्धकुंभ नहीं छोड़ते हैं और हर कुंभ के दौरान मेले में ही रहकर अपना व्यवसाय चलाते हैं। जूना अखाड़े के साधु-संतों और महंत से उनकी अच्छी बनती है, इसलिए अखाड़े में ही उनके रहने के लिए टेंट की व्यवस्था की गई है। बिजली की फिटिंग से लेकर कनेक्शन तक जो भी काम होता है, मुल्ला की टीम ही करती है। मुल्ला जी के पास पंद्रह लोगों की टीम है। इस टीम में और मुस्लिम भी शामिल हैं।मुल्ली के नेतृत्व में जूना अखाड़े में बिजली का हर काम इतनी सहजता से चल रहा है कि यहां के सभी साधू-संत इनके काम से बहुत खुश हैं।

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