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अपने सैनिको के लिए संयुक्त राष्ट्र से लड़ गई म्यंमार की सरकार. भारत में मेजर गोगोई पर होने जा रही कड़ी कार्यवाही, और इंस्पेक्टर शैलेन्द्र काट रहा ३ साल से जेल

पहली तस्वीर है म्यन्मार से , यहाँ पर संयुक्त राष्ट्र संघ बार बार रिपोर्ट जारी कर के बोल रहा है की म्यन्मार की सेना ने किया है रोहिंग्या का समूहिक नरसंहार लेकिन उसकी एक भी बात को न मान कर म्यन्मार की सरकार अडिग है अपने बयान पर और बार बार संयुक्त राष्ट्र को ये संदेश दे रही है कि उसके सैनिक निर्दोष हैं और उन्होंने जिसे मारा वो उसके पात्र थे . म्यन्मार की सरकार ने साफ़ साफ़ कहा है की उसकी सेना ने बस उन्हें ही मारा है जिन्होंने म्यन्मार के लोगों के खिलाफ आतंकी रूप धारण कर लिया था और शुरू कर चुके थे वो तमाम कार्य जिसके लिए म्यन्मार के कानून के अनुसार मौत ही उचित सजा थी .

इस से पहले मानवाधिकार संस्था , रेडक्रास , एमिनेस्टी और इस्लामिक देश के समूह ने एक स्वर में म्यन्मार की सरकार से अपनी सेना को रोकने का दबाव बनाया था . इनके साथ खुद ईसईयो के सर्वोच्च पोप भी बंगलादेशी कैम्प तक चले गये थे जिसमे म्यन्मार की सेना से लड़ कर और उसके बाद हार कर भागे तमाम रोहिंग्या छिपे हुए थे ..इसके बाद उन्ही पोप ने ईसाईयों को रोहिंग्या की मदद करने के लिए कहा था . पर इन तमाम दबावों का म्यन्मार की सरकार और वहां की सेना पर किसी भी प्रकार का कोई असर नहीं पड़ा और वो अपने देश के शत्रुओ का दमन करना जारी रखा .. इस में आन सांग सू ची का रोल सबसे ज्यादा था . इन्हें नोबल पुरष्कार दिया गया था अन्तराष्ट्रीय बिरादरी द्वारा पर ये टस से मस भी नहीं हुई और करती रही सेना के साथ मिल कर वो कार्य जो इनके देश के लिए सही था ..

वहीँ भारत में इस से थोड़ी सी उलट तस्वीर रही . एक तरफ इलाहाबाद की अदालत में अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करते हुए नबी अहमद को कथित रूप से गोली मारने वाला उत्तर प्रदेश पुलिस का सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ३ साल से जेल काट रहा है,  कश्मीर में अपनी बटालियन को भयानक पत्थरबाजी से बचाने के लिए गोली चला देने वाले मेजर आदित्य के पिता अपने बेटे की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के चक्कर लगा रहे हैं, और तो और अब कश्मीर के सबसे चर्चित सैनिक अफसरों में से एक मेजर लितुल गोगोई पर भी कड़ी कार्यवाही की घोषणा कर दी गयी है जिसमे उनका कोर्ट मार्शल तक सम्भव बताया जा रहा है . इसके साथ साथ मानवाधिकार आयोग के नोटिस पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा आमने सामने की मुठभेड़ में बड़े पराक्रम से मारे गए जान मुहम्मद और मुकीम काला जैसे 19 दुर्दांत अपराधियों के मुद्दे पर जांच चलने लगी है जिसमे ज़रा सी चूक पर पुलिस वालों की नौकरी जाना तय है . इसके साथ साथ सुकमा के जंगलों में नक्सलियों से आमने सामने लड़े कई जवान तमाम नोटिसो का सामना कर रहे हैं .. इसको समझने और सोचने की जरूरत है अन्यथा आने वाले समय में वर्दी का मनोबल देश के मनोबल पर असर जरूर डालेगा ..

 

*उपरोक्त विचार लेखक के स्वतंत्र विचार हैं .

लेखक – राहुल पांडेय

सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज

मो – 9598805228

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