सिर्फ मासिक धर्म ही नहीं, और भी तमाम कारण है पवित्र सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश वर्जित को ले कर जिसके खिलाफ चल रही तमाम साजिशें

पवित्र सबरीमाला के पावन इतिहास से जो लोग अभी अनजान हैं उनके लिए ही वहां की परम्पराओं पर सवाल उठाना अभिव्यक्ति की वो आज़ादी है जिसके पीछे भारत में न जाने क्या क्या बोल जाते हैं कुछ लोग . लेकिन सनातन परम्परा में विश्वास करने वाले तमाम धार्मिक लोगों के लिए सबरीमाला का पावन इतिहास और उसका पौराणिक महत्व उनके पूर्वजो द्वारा दिया गया वो आशीर्वाद है जिसको वो सदियों से सहेज कर आये थे .

ज्ञात हो कि दक्षिण में जहाँ हिन्दुओ का श्रृंखलाबद्ध नरसंहार PFI जैसे समूहों पर करने का आरोप लग रहा है तो वहीँ चौराहे पर गौ मांस काट कर खाना भी कुछ लोगो ने अपनी स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति बना डाला है .. लेकिन अब उसके आगे बढ़ गये हैं कुछ लोग और पावन धाम सबरीमाला की उस परम्परा पर वार कर रहे हैं जो वहां के हिन्दुओ की एक प्रकार से अमिट निशानी के रूप में सदियों से स्थापित रहा है . ध्यान देने योग्य है कि दक्षिण के सबसे प्रसिद्ध हिन्दू शक्तिपीठो में से एक सबरीमाला भारत के प्रमुख हिंदू मंदिरों में एक है| पूरी दुनिया से लाखों श्रद्धालु आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर परिसर में आते हैं|

सबरीमाला मंदिर में दर्शन को लेकर कई मान्यताएं हैं| कुछ के मुताबिक महिलाओं के पीरियड्स होने को अशुभ माना जाता है तो कई मान्यताओं के मुताबिक भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए बहुत ही पवित्र और कठिन पूजा करनी होती है| इस मन्दिर से जुडी पुरानी पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, भगवान अयप्पा अविवाहित हैं| वे अपने भक्तों की प्रार्थनाओं पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं| उन्होंने तब तक अविवाहित रहने का फैसला किया है जब तक उनके पास कन्नी स्वामी (यानी वे भक्त जो पहली बार सबरीमाला आते हैं) आना बंद नहीं कर देते|” महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर रोक की बात का पीरियड्स से कुछ भी लेना-देना नहीं है|

एक कथा यहाँ के हिन्दू समाज के हर घर में आज भी कही और सुनी जाती है . उसी धार्मिक कथा के मुताबिक समुद्र मंथन के दौरान भोलेनाथ भगवान विष्णु के मोहिनी रूप पर मोहित हो गए थे और इसी के प्रभाव से एक बच्चे का जन्म हुआ जिसे उन्होंने पंपा नदी के तट पर छोड़ दिया| इस दौरान राजा राजशेखर ने उन्हें 12 सालों तक पाला| बाद में अपनी माता के लिए शेरनी का दूध लाने जंगल गए अयप्पा ने राक्षसी महिषि का भी वध किया| पुराणों के अनुसार अयप्पा विष्णु और शिव के पुत्र हैं| यह किस्सा उनके अंदर की शक्तियों के मिलन को दिखाता है न कि दोनों के शारीरिक मिलन को| देवता अयप्पा में दोनों ही देवताओं का अंश है, जिसकी वजह से भक्तों के बीच उनका महत्व और बढ़ जाता है|

मंदिर में प्रवेश के लिए तीर्थयात्रियों को 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी होती हैं| मंदिर की वेबसाइट के मुताबिक, इन 18 सीढ़ियों को चढ़ने की प्रक्रिया इतनी पवित्र है कि कोई भी तीर्थयात्री 41 दिनों का कठिन व्रत रखे बिना ऐसा नहीं कर सकता| श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले कुछ रस्में भी निभानी पड़ती हैं. सबरीमाला के तीर्थयात्री काले या नीले रंग के कपड़े पहनते हैं और जब तक यात्रा पूरी न हो जाए, उन्हें शेविंग की इजाजत भी नहीं होती| इस तीर्थयात्रा के दौरान वे अपने माथे पर चंदन का लेप भी लगाते हैं| माना जाता था कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और जो महिलाएं रजस्वला होती हैं उन्हें मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं होनी चाहिए|

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