विदा हो रहा वो महान व्यक्तित्व जिसके प्रयास से ही भारत की राजनीति में आये “जय श्री राम” “भारत माता की जय” “हिंदुत्व” जैसे शब्द

ये वो समय था जब सत्ता केवल एक पार्टी के हाथ में रही .. न सिर्फ प्रधानमन्त्री , राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति जैसे उच्चतम पद अपितु गाँव के प्रधान तक एक ही पार्टी के हुआ करते थे . उस समय उनकी संख्या बल और जनता के बीच में बनी उनकी छवि का कुछ यू असर था भारत वालों पर की उनकी बात ही पत्थर की लकीर मानी जाती थी .. उनमे इतनी ताकत थी कि देश के विभाजन जैसे बड़े फैसले भी उन्होंने ले लिए जिसका विरोध करने वाले बाद में पूरी सोची समझी रणनीति से घोषित कर दिए गये साम्प्रदायिक और भी तमाम आरोपों से .. उस समय अटल जी ने भारत को दी थी एक नई दिशा..

स्वर्गीय अटल जी के पास एक रास्ता ये भी था की वो इनके साथ आराम से समझौता कर के सत्ता सुख को प्राप्त कर सकते थे लेकिन इन्होने संसद के एयरकंडीशन में बैठने के बजाय उतरने का फैसला किया राजस्थान के तपते रेगिस्तानो में , हिमालय की बर्फीली वादियों में, असम के जंगलों में और दक्षिण के बरसात बहुल इलाकों में .. इनके साथ धीरे धीरे कारवां जुड़ता चला गया और अंत में आज वही कारवां वट वृक्ष बन कर आज भारतीय जनता पार्टी के उस रूप में खड़ा है जो देश ही नहीं संसार की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है. इतना ही नहीं भारत के एक बड़े भूभाग पर इसी पार्टी के शासको का शासन है . 

अटल जी ने अपनी विचारधारा वही रखी जो भले ही कुछ के समझने के लिए साम्प्रदायिक रही हो पर वो भारत के मूल को अपनी पहिचान बनाये . शुरू में उन्हें एक एक व्यक्ति को जोड़ना पड़ा था लेकिन बाद में उनकी विचारधारा को पूरे भारत के एक बड़े वर्ग ने स्वीकार किया .. कहना गलत नहीं होगा की भारत माता की जय , जय श्री राम , वंदेमातरम् जैसे जबरन विस्मृत किये जा रहे उद्बोधनो को जीवंत करे वाला वो महान व्यक्तित्व आज संसार से विदा हो रहा है . जिन उद्घोषो को साम्प्रदायिकता से जोड़ दिया गया था उन्ही उद्घोषो को राष्ट्रीय पहिचान को अगर किसी ने बनाया है तो वो थे श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी .. राष्ट्र ने आज खो दिया है वो महानायक जो चट्टान से भी ज्यादा मजबूत सत्ता से लड़ा और फिर देश को दिया वो दिशा जो आज “गर्व से कहो हम हिन्दू हैं” जैसे शब्दों को जीवंत किया …. 

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