आज रात हम मुसलमानों के वेश में घूमेंगे, जब कोई हम पर हमला करेगा तो उसे गोली मार देंगे- “ये शब्द भारत के एक प्रधानमन्त्री के हैं”

बहुत लोगों को ये हैरान कर देने वाली बात लगेगी और कईयों को तो ये विश्वास न करने लायाक तथ्य लगेंगे .. इतना ही नहीं , बहुतो को बताया ही नहीं गया होगा इस घटना के बारे में जिसे उस समय सबसे ज्यादा प्रचारित किया गया था . यद्दपि आम जनमानस को इतिहास और सच दोनों जानने का पूरा अधिकार है इसके चलते ही ये सच सामने रखा गया है जब आमने सामने लड़ रहे डॉ पक्षों में से एक पक्ष की तरफ से खड़ा हो कर एक प्रधानमन्त्री खुद ही रिवाल्वर निकाल कर पूरा प्लान बना चुका था मुस्लिमों को उस भीड़ से बचाने के लिए जिस भीड़ को गुस्सा आ रहा था पाकिस्तान से ट्रेनों में भर कर आ रही हिन्दुओ और सरदारों की लाशो को देख कर ..

कश्मीर, असम , बंगाल आदि ने कई बड़े बड़े मामलों को देखा लेकिन कभी किसी प्रधानमन्त्री द्वारा ऐसी सक्रियता नहीं दिखी .. ऐसा करने वाले कोई और नहीं बल्कि जवाहर लाल नेहरु थे जो कांग्रेस पार्टी के उस समय सर्वेसर्वा माने जाते थे . उन्होंने अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को भारत की संस्कृति बना देने के सभी सम्भव प्रयास किये थे .. उसी में से एक ऐसा मामला ये था जिसकी मिशाल आज तक भारत ही नहीं बल्कि किसी और देश में नहीं मिली है . ये वही नेहरु थे जो चीन से युद्ध के समय कई भारतीय सैनिको के बलिदान के समय भी सीमा पर उन सैनिको के साथ हथियार उठाने नहीं गये थे लेकिन जब दिल्ली में हिन्दू मुस्लिम विवाद हुआ तब खुद ही इन्होने हथियार निकाल लिया था मुसलमानों पर हमला करने वालों को खुद से अपने हाथ से ही गोली मारने के लिए ..

ये दावा है नेहरु के बेहद ख़ास रहे पूर्व आईसीएस अधिकारी और कई देशों में भारत के राजदूत रहे बदरुद्दीन तैयब का .. इन्होने अपनी आत्मकथा ‘मेमॉएर्स ऑफ़ एन इगोइस्ट’ में इन घटनाओं का जिक्र किया है.. तैयब लिखते हैं, “उन्होंने मुझसे कहा कि हम लोग गंदे और पुराने कुर्ते पहन कर रात को मिंटो ब्रिज चलेंगे. हम ये दिखाएंगे कि हम भी भाग रहे मुसलमान हैं. अगर कोई हम पर हमला करने की कोशिश करेगा तो हम उसे गोली से उड़ा देंगे. मैं नेहरू की ये बात सुन कर हक्का बक्का रह गया. दरअसल ये रिवॉल्वर उनके पिता मोतीलाल की थी, जिससे सालों से कोई गोली नहीं चलाई गई थी.” सवाल यहाँ ये उठता है की अंग्रेजो के खिलाफ पूर्ण अहिंसक नीति अपनाने वाले नेहरु मुस्लिमों के खिलाफ आक्रामक रुख अपना चुकी उस भीड़ पर हिंसक कैसे हो गये और उन्हें उस समय रिवाल्वर की जरूरत क्यों महसूस हुई जबकि वो मानते थे कि अहिंसा से ही सब कुछ सम्भव है ..

 

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