उधर हिन्दुओ पर लद रहे थे मुकदमे, इधर कांग्रेस सरकार भेज रही थी सुदर्शन न्यूज को बंद करने की नोटिस.. लेकिन इंच भर भी नहीं हटे हम और अब मुजफ्फरनगर में हुआ न्याय

जहाँ एक तरफ अखिलेश यादव के नेतृव में तत्कालीन प्रदेश सरकार व्यस्त ही उन लोगों पर मुकदमे दर्ज करने में जिन्होंने अपने ऊपर हुए हमले का प्रतिकार किया था तो वहीँ दूसरी तरफ शत प्रतिशत सत्य खबर और दंगाइयो को दंगाई कहते सुदर्शन न्यूज को भेजा जा रहा था तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस सरकार द्वारा नोटिस और कहा जा रहा था चैनल को बंद करने के लिए . इतना ही नहीं सुदर्शन न्यूज के प्रयोजको को भी हमसे दूर रहने के लिए कहा गया जिसका उद्देश्य था सुदर्शन न्यूज को आर्थिक रूप से तोड़ने का .. और इन सब पर बुद्धिजीवी वर्ग खामोश रहा था .

लेकिन आख़िरकार समय के साथ न्याय हुआ और अदालत के फैसले के बाद शत प्रतिशत सत्य साबित हुआ सुदर्शन न्यूज . यद्दपि इसमें थोडा समय लगा लेकिन सत्यमेव जयते का सिद्धांत यहाँ पर लागू हुआ . भले ही आज पश्चिम बंगाल की घटना पर एकजुट विपक्ष केंद्र सरकार पर सत्ता के दुरूपयोग का आक्षेप लगा रहा हो पर उस समय सत्ता के ही प्रभाव से सुदर्शन न्यूज का मुह बंद करने का कुत्सित प्रयास क्या सत्ता का दुरूपयोग नहीं कहा जाएगा .

सत्य के साथ चट्टान की तरह अटल रहे सुदर्शन न्यूज को उस समय ऐसा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था कि उसकी भरपाई अभी तक नहीं हो पाई है पर आख़िरकार सुदर्शन न्यूज सत्ता की हनक में झूमने वाले उन तमाम लोगो को एक साफ़ संदेश दे चुका है कि उसकी निष्ठा और खबर पर ऊँगली उठाना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है. मुज़फ्फरनगर की अदालत ने सचिन और गौरव के सभी हत्यारों को दोषी मान कर उनकी सज़ा के लिए 8 फरवरी दिन सुनिचित किया है .. अदालत का ये फैसला मुहर है उन तमाम साजिशकर्ताओं के खिलाफ सुदर्शन के सत्य और अटलता का .

इस पूरे मामले में मृतक गौरव के पिता रविन्द्र सिंह की ओर से जानसठ कोतवाली में मुजस्सिम, मुजम्मिल, फुरकान, नदीम, जहांगीर, शाहनवाज (मृतक), अफजाल और इकबाल के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था. एक लम्बे समय के बाद  सत्य और न्याय की इस जीत के साथ सुदर्शन न्यूज आगे भी संकल्प लेता है सत्य को सत्य के रूप में दिखाने के लिए और असली संदेश ठीक उसी रूप में जनता तक पहुचने के लिए..

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