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सत्ता ने बर्खास्त किया था सिपाही प्रशांत को अब न्यायपालिका ने 16 PAC जवानों को दी उम्रकैद, जिन पर आरोप हैं दंगों में मुसलमानों को मारने का… तबाह हुए 16 परिवार

वो बेहद विकट समय था .. सन 1987 में जब उन सभी जवानों की ड्यूटी वहां लगी थी जो इलाका मुस्लिम बहुल माना जा सकता था .. वहां रह रहा हिन्दू समुदाय बेहद डरा और सहमा था .. उन्हें कभी भी अपने प्राणों का जाने का खतरा महसूस हो रहा था .. हर कदम की आहट उन्हें मौत की आहट लग रही थी और वो किसी देवदूत अथवा फरिश्ते के आ कर उन्हें बचा लेने मात्र की आशा कर रहे थे …
वो देवदूत उन्हें दिखे थे वर्दी वालों के रूप में जब उनके धमक ने तोड़ डाले कट्टरपंथियों और दंगाईयो के मंसूबे और हर कोई शांतिप्रिय सीना उठा कर चलने लगा , ते सोच कर कि अब PAC वाले आ चुके हैं ..उत्तर प्रदेश पुलिस की इस खास विंग के रहते चिंता की कोई जरूरत नहीं ..बच्चो ने घरों से निकल कर उनके पैर छुए , युवाओं ने उन्हें गले से लगाया और वृद्धों ने उन्हें आशीर्वाद दिया था .. हर जुबान पर बस इतना शब्द तब थे कि भैया आप लोग हमारे लिए किसी देवता से कम नही हो … आप न आते तो हम जिंदा न बचते..पूरे प्रदेश ही नही बल्कि पूरे भारत मे उस समय UP पुलिस की PAC विंग की जय जयकार होने लगी..लेकिन ठीक उसी समय रची जाने लगी थी साजिश और खटकने लगी थी ये वीरता कईयो की निगाह में ..
फिर अचानक से गर्म हुई राजनिति..मुद्दा ये नही बना कि वर्दी वाले इन फरिश्तों ने किन किन को और कितनो को बचाया .  बल्कि मुद्दा ये बनाया गया कि इन्होंने कितनो को मारा ..इन वर्दी वालों पर कितनी गोलियां चली, कितने पत्थर चले, कितने बलिदान हुए इसकी गिनती पिछले 30 सालों में एक बार भी नही हुई लेकिन पिछले 30 सालों  में पूरी कोशिश इस बात की कर डाली गई कि कैसे इन रक्षको को हत्यारा साबित किया जाय और आखिरकार उसमें सफलता मिल ही गयी …
अगर कोई ये समझना और जानना चाहता है कि असल जिंदगी में फिल्मी दुनिया मे दिखने वाले सिंघम क्यों नही दिखते तो मेरठ के हाशिमपुरा मामले में सज़ा पाए जवानों के जीवन मे चल रही अग्निपरीक्षा से देख और समझ सकता है .. राजनीति में कुछ लोग अपने राजनैतिक जीवन के 10 या 15 साल के संघर्षों के ढिंढोरा भले पीटते हो लेकिन PAC के इन जवानों ने 30 साल से ज्यादा समय तक वो अग्निपरीक्षा दी है जो शायद सुन कर भी रोंगटे खड़े कर दे ..आखिरकार 16 जवानों को हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा दी ।। भले ही श्रीराम भगवान का वजूद, खुदाई आदि के बाद भी मांगा जाता है लेकिन न्यायाधीश महोदय 30 साल पुरानी उस घटना के होने से सहमत पाए गए जिसका शायद ही कोई वीडियो रिकार्डिंग आदि मौजूद हो ..
यहां राजनीति के एक और पहलू को ध्यान में रखने की जरूरत है .. उत्तर प्रदेश की बीच मे आई सरकारों में से एकाध ने कचेहरियो में हुए बम ब्लास्ट के दुर्दांत आतंकियों के केस वापस लेने की मुहिम छेड़ी थी लेकिन विगत 30 सालों में न जाने कितनी सरकारों के आने या जाने के बाद भी PAC के इन जवानों के मुकदमे वापस लेने की मुहिम तो दूर, इन्हें कितनी जल्दी सज़ा दिलाई जाय इसकी मुहिम जारी रही..और आखिरकार वो मुहिम अंजाम तक पहुच ही गयी ..
किसी ने अपनी जमीन बेच कर कानूनी लड़ाई लड़ी थी तो किसी ने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रख कर, किसी ने अपने बच्चों की फीस रोक कर तो किसी ने बेटियों के स्कूलों से नाम कटवा कर .  वो सामान्य सिपाही थे और 1987 में वेतन भी इतना मिलता था कि आज उस से आप 1 किलो घी भी नही खरीद सकते हैं … समाज की रक्षा और दंगाईयो से निबटने के लिए उस समय जान हथेली पर रख कर कूदे 16 जवान अब अपने जीवन के अंतिम सांस  तक जेल काटेंगे ..यदि आपको कश्मीर में लड़ रहे सेना के जवानों के हालात बहुत विषम लगते हैं तो कृपया उत्तर प्रदेश के पुलिस व PAC के जवानों के हालात पर भी एक बार गौर कीजिए .. यकीनन 30 साल से तिल तिल कर के मर रहे इन जवानों के परिवार वालों के हालात आपको रुला देंगे.. देश की न्यायपालिका सर्वोच्च है, उतनी सर्वोच्च कि इन 16 सिपाहियों की तो बहुत छोटी हस्ती है, वो सबरीमला व भगवान श्रीराम तक के मुद्दे पर फैसला देती है .. लेकिन सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश पुलिस के मनोबल पर ये घटना क्या असर डालेगी इस पर मंथन माननीयों को गम्भीरता से जरूर करना चाहिए ..
यहां ध्यान रखने वाली बात ये है कि अब सज़ा पाए इन 16 जवानों के परिवार या इनका कोई भी नही है .. न इनके अधिकारी, न इनके शासक और न ही वो लोग जिनको दंगो से उस समय इन्होंने बचाया था ..अब ये सभी 16 लोग आज सदा सदा के लिए जेल चले गए हैं .. दंगा, आतंक, अपराध से लड़ती एक उग्र जिंदगी का एक बेहद दर्दनाक अंत जिस दर्द का एहसास शायद ही इनके परिवार वालों और ऐसी आफत झेल रहे वर्दी वालों के अलावा किसी और को हो ।।
उपरोक्त विचार लेखक के स्वतंत्र विचार हैं
लेखक –
राहुल पांडेय
सहायक सम्पादक – सुदर्शन न्यूज
नोएडा , उत्तर प्रदेश
मोबाइल – 09598805228
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