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अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले पर घिरी मोदी सरकार… आक्रोशित संतों का सरकार को अल्टीमेटम

नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बाद भी अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण में देरी पर अब संत समाज आंदोलित होता हुआ नजर आ रहा है. सिर्फ संत समाज बल्कि आम हिन्दू जनता भी अब इस बात से न सिर्फ नाराज बल्कि निराश भी है कि राम मंदिर निर्माण की जिन आशाओं तथा उम्मीदों के साथ मोदी सरकार को चुना था वो सभी उम्मीदें ध्वस्त होती नजर आयी हैं. यद्यपि श्रीराम मंदिर को लेकर 29 अक्टूबर से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई होनी है लेकिन इससे पहले ही विहिप तथा संत समाज मुखर हो चुका है. शुक्रवार को हुई विहिप व संत समाज की अहम् बैठक में संतों ने मोदी सरकार को चार महीने का अल्टीमेटम दिया है.  संतों ने कहा कि केंद्र सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में हिंदुत्व से जुड़े सभी अहम मुद्दों मसलन राम मंदिर, अनुच्छेद 370, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में विमर्श तक नहीं किया गया.

अयोध्या श्रीराम मंदिर को लेकर संतों ने साफ कहा है कि सरकार 31 जनवरी तक मंदिर निर्माण का सरकार रास्ता तलाशे . इसके अलावा संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने के लिए दबाव बनाने का फैसला लिया है. संतो ने कहा कि 31 जनवरी तक सरकार कोई फैसला नहीं करती है तो फिर 1 फरवरी को धर्म संसद में आगे की रणनीति बनाई जाएगी. इसके अलावा नंबवर महीने में देश के सभी सांसदों से मिलकर राममंदिर निर्माण के मुद्दे को संसद में उठाने के लिए दबाव बनाएंगे. इसके अलावा  6 दिसंबर से 18 दिसंबर ( गीता जयंती ) तक देश भर के मंदिरो, गुरुद्वारों में राम मंदिर निर्माण के लिए कार्यक्रम करने की संतों ने योजना बनाई है.  शुक्रवार को हुई संतों की बैठक में वीएचपी की राम मंदिर के निर्माण को लेकर प्रस्ताव पास किया. प्रस्ताव में कहा गया हैं कि सभी राज्यों में धार्मिक, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ देश के सभी राज्यों के राज्यपाल से मुलाकात कर राम मंदिरन निर्माण को लेकर जनभावना से अवगत कराएंगे. इसके अलाव राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करने की योजना संतों ने बनाई है.

वीएचपी से जुड़े देश के करीब 40 संतों ने शुक्रवार को दिल्ली में बैठक कर आगे की रणनीति तय की. संतों की उच्चाधिकार समिति के साथ बैठक में कई संतों ने राम मंदिर के निर्माण पर केंद्र सरकार के रूख पर नाराजगी जताई और कहा कि अगर केंद्र सरकार अगर कोर्ट में लंबित होने के बाद एससी/एसटी अट्रोसिटी एक्ट को संसद से कानून बना सकती है, तीन तलाक बिल पर अध्यादेश ला सकती है तो राम मंदिर के निर्माण के लिए ऐसा क्यों नहीं किया जा सकता. बैठक के बाद आचार्य महामंडलेश्वर विशोकानंद ने कि देशभर में लोग पूछते हैं कि क्या सोच कर आप लोगों ने मोदी जी को प्रधानमंत्री बनाया, मंदिर तो बना नहीं. रामलीला मैदान में सभा हो, मोदी जी को उसमें बुलाया जाए. वहीं महामंडलेश्वर डॉ रामेश्वरदास वैष्णव जी महाराज ने मांग करते हुए कहा कि कानून से पहले सरकार तीन तलाक की ही तरह राम मंदिर निर्माण के लिए भी अध्यादेश लाए.

बैठक के दौरान कई संतों ने यह याद दिलाया कि 1989 ने पालनपुर में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि केंद्र में जब भी उनकी सरकार आएगी तो वह राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी.  लेकिन संतों की ओर से यह शिकायत की गई कि पिछले 20 साल में दो बार केंद्र में बीजेपी नेतृत्व की सरकार बन चुकी हैं लेकिन अभी तक राम मंदिर का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा हुआ है. संतों ने यह तय किया कि केंद्र सरकार से वह मांग करेंगे कि राम मंदिर के निर्माण को लेकर जल्दी ही अध्यादेश लाया जाए और अगले संसद के सत्र में अध्यादेश पर कानून बनाया जाए. संतों ने ये भी कहा कि अगर केंद्र सरकार राम मंदिर निर्माण के लिए कानून नहीं बनाती है तो वीएचपी की राम मंदिर निर्माण के संतों की उच्चाधिकार समिति के नेतृत्व में हिंदू समाज एक बार मंदिर के निर्माण के कारसेवा के जरिये बड़ा आंदोलन करेगा.

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