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पाकिस्तान से जम्मू आये हिन्दुओं को मोदी सरकार की सौगात…मुस्कुरा उठे पीड़ित हिन्दुओं के चेहरे

जब नापाक मुल्क पाकिस्तान में उन पर जुल्म की इन्तहा हो गयी तब उन्होंने हिंदुस्तान आने का फैसला किया. पाकिस्तान में अंतहीन प्रताड़ना झेलने के बाद उन्होंने तय किया किया है कि वह भारतमाता की गोद में जायेंगे और अपना घर-दुकान सब कुछ छोडकर वह जम्मू चले आये. उन्हें उम्मीद थी कि हिंदुस्तान आकर उनका समय बदलेगा, उनके परेशानी दूर होंगी लेकिन अफ़सोस ऐसा हो नहीं सका. इसके बाद भी इन लोगों को ये उम्मीद लगी रही कि एक न एक दिन हिंदुस्तान की सरकार उनकी सुध जरूर लेगी. २०१४ में मोदी सरकार आने के बाद उनकी आशाओं को पंख लगे और आखिर वह समय आ गया जब उनकी आशाएं पूरी होती नजर आ रही हैं.

हम बात कर रहे हैं पाकिस्तान से जम्मू आकर रहने वाले हिन्दुओं की, जिनके लिए सरकार ने एक योजना को मंजूरी दे दी है. सरकार की इस योजना के तहत इन शरणार्थियों के हर परिवार को साढ़े पांच लाख रूपए की आर्थिक सहायता मुहैया कराई जाएगी. पीटीआई के मुताबिक यह निर्णय राज्यपाल सत्यपाल मलिक की अध्यक्षता में राज्य सलाहकार परिषद की बैठक में लिया गया. एक आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जून 2018 में इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी थी और इस योजना पर होने वाला खर्च केंद्र सरकार ही वहन करेगी. जम्मू के मंडल आयुक्त को इस योजना को लागू करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है.

ज्ञात हो कि 1947 में हुए बंटवारे के दौरान लाखों लोग शरणार्थी बनकर भारत आए थे. ये लोग देश के कई हिस्सों में बसे और आज उन्हीं का एक हिस्सा बन चुके हैं. एक आंकड़े के अनुसार उस वक्त करीब 5764 हिंदू परिवार पश्चिमी पकिस्तान से आकर जम्मू में भी बस गये थे.  देश के दूसरे हिस्सों में बसे पश्चिमी पाकिस्तान के शरणार्थी आज वहां के स्थायी निवासी बन चुके हैं. लेकिन जम्मू-कश्मीर में स्थिति ऐसी नहीं है. यहां आज भी दशकों पहले बसे लोगों की चौथी-पांचवी पीढ़ी शरणार्थी ही कहलाती है और तमाम मौलिक अधिकारों से वंचित है लेकिन केंद्र सरकार अब इनको लेकर गंभीर है तथा इनकी मदद करने का फैसला किया है.

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