3 अक्टूबर- 1824 में ही स्वतंत्रता का बिगुल फूंक चुके राजा विजय सिंह को आज ही मिली थी वीरगति. इस युद्ध में खड्ग भी था और ढाल भी

अभी थोड़े समय में पहले अहिंसा और बिना खड्ग बिना ढाल वाले नारों और गानों का बोलबाला था . हर

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सादगी और दृढ़ता के प्रतीक धरती के लाल लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्म दिवस पर उन्हें बारम्बार नमन

राष्ट्र आज भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, सादगी और दृढ़ता के प्रतीक लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती मना धूमधाम से

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धर्मजागरण के सूत्रधार, हिंदुत्व के पुरोधा श्रीरामलोक वासी श्रद्धेय अशोक सिंहल जी को उनके जन्मदिवस पर बारम्बार नमन

श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के दौरान जिनकी हुंकार से रामभक्तों के हृदय हर्षित हो जाते थे, वे श्री अशोक सिंहल संन्यासी

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23 सितम्बर- बलिदान दिवस, 1857 के क्रांतिवीर राव तुलाराम जिनकी भुजाओं से कांपी थी ब्रिटेन की धरती भी

राव तुलाराम का जन्म 9 दिसंबर 1825 में हरियाणा प्रान्त के रेवाड़ी जिले में एक यादव राज-घराने में हुआ था.

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19 सितम्बर- हरिद्वार में आज ही हुआ था युद्ध गौभक्तों व् गौ हत्यारों के बीच में जिसमे इंस्पेक्टर शिवदयाल को मिला कालापानी और 4 अन्य को फांसी

आजदी मिलने से पहले ही भारत में अनेक स्थानों पर कट्टरपंथी खुलेआम गोहत्या करते थे, असल में वो इसके माध्यम

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18 सितम्बर – बलिदान दिवस पिता- पुत्र राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह जो तोप से उड़ा देने तक प्रजा को देते रहे युद्ध का संदेश

कितना सच है दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल .. इस गाने में कितनी सच्चाई है ये ऐसे

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16 सितम्बर-“मैं जा रहा जवानों पर याद रखना, एक इंच भी जमीन न जाने पाए”- लेफ़्टिनेंट कर्नल ए बी तारापोरे बलिदान दिवस

ये वो वीर हैं जिनका नाम लेने में भी समस्या थी शायद नकली कलमकारों को .. अपनी एक एक सांस

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15 सितम्बर – पाँचवें सरसंघचालक वंदनीय के एस सुदर्शन जी को पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि.. धर्म व राष्ट्र हेतु समर्पित रहा आपका जीवन आज है करोड़ों का प्रेरणास्रोत

राष्ट्रप्रेम व धर्मरक्षक दोनों छवियों का सामूहिक मिश्रण अगर कहीं देखा जाय तो वंदनीय के एस सुदर्शन जी से बेहतर

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14 सितम्बर – बलिदान दिवस वीर लाला जयदयाल, 1857 में खत्म कर दिया अत्याचारी मेजर बर्टन का परिवार और फिर हंस कर झूल गए फांसी पर

किसी लक्ष्य का ठेका ले लेना और फिर उस लक्ष्य को पूरा करना दोनों में बहुत अंतर होता है .

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13 सितम्बर- बलिदान दिवस क्रान्तिवीर जतिंद्रनाथ दास. अंग्रेजों ने पागलखाने के डॉक्टर को बुला कर नसों में लगाए इंजेक्शन पर जुबान पर गूंजता रहा “वन्देमातरम”

किसने कहा की मिली थी आज़ादी हमे बिना खड्ग बिना ढाल , कैसे मान लें की क्रांतिकारी वो अपने रक्त

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