24 फ़रवरी- हत्यारे अकबर के सैकड़ों लुटेरे सिपाहियों को मौत दे कर आज वीरगति पा गए थे योद्धा कल्लाजी राठौर. पर अकबर महान कैसे और ये गुमनाम कैसे ?

कुछ चाटुकार इतिहासकारों की अक्षम्य भूल के कारण विस्मृत कर दिए गए राजस्थानी सिंह व् मुग़ल सल्तनत की नींव हिला

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23 फरवरी- बलिदान हुई थी आज 8 वर्ष की वो मासूम वैदेही जिसके दूध के दांत तोड़ कर, खौलते पानी मे उबाला गया पर उसने नहीं कबूल किया इस्लाम

ये सत्यघटना है उस मासूम बच्ची की जिसने वो सब कुछ अपने ऊपर झेला जो किसी ने किताबो में पढ़ा

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21 फ़रवरी – अंग्रेजों के साथ गद्दारों का भी संहार करती हुई आज ही बलिदान हो गईं थी कित्तूर की रानी चेन्नम्मा, लेकिन कर्नाटक में इनके बजाय सत्ता मना रही हत्यारे टीपू सुल्तान की जयंती

ये भारत की तथाकथित सेकुलर राजनीति भले ही कुछ करवाये अन्यथा वीर वीरांगनाओं ने अपना कर्तव्य निभा ही दिया था..

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20 फ़रवरी- सुकमा जिले में नक्सलियों की सटीक जानकारी सुरक्षाबलों को देते हुए आज ही वीरगति पा गए थे IB अधिकारी उमाकांत सिंह

ये वीर भी उन जगमगाते सितारों में से एक हैं जिनको भले ही ज्यादा प्रचार आदि न मिला हो लेकिन

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18 फरवरी – जन्मदिवस क्रांतिवीर मदनलाल ढींगरा. लंदन में जा कर क्रूर कर्जन वाइली का वध किया और वहीं श्रीमद्भागवत गीता ले कर झूल गए थे फाँसी

जरा खुद से सोचिये कि हमको क्या क्या पढाया गया और हम क्या क्या पढ़ते रहे .. पढाया गया कि

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17 फरवरी- आज़ादी की नींव के पत्थर वासुदेव बलवंत फड़के ने आज ही प्राप्त की थी अमरता. वो महायोद्धा जो आज भी दूर है इतिहास के स्वर्णिम पन्नों से

कुछ चाटुकार इतिहासकारों के षडयंत्र के कारण भुला दिए गए अनंत अमर बलिदानियों में से एक श्री वासुदेव बलवंत फड़के

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15 फरवरी – 2010 पश्चिम बंगाल में नक्सलियों से लड़ कर आज ही बलिदान हुए थे ईस्टर्न फ्रंटियर के 24 योद्धा.. हत्यारे के नाम में “जी” आज भी लगाते हैं अर्बन नक्सल

वो कम्युनिस्ट थे, वो कुछ नेताओं की तरह ही लाल सलाम किया करते थे.. लेकिन उसके नाम के पीछे जी

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13 फ़रवरी – बलिदान दिवस वीर बुद्धू भगत.. अंग्रेजो की बंदूकों के खिलाफ कुल्हाड़ी से लड़े और खुद के साथ दिया पूरे परिवार का बलिदान

सच्चे वीरों का बलिदान ..क्यों भूल गया है हिंदुस्तान.. बुधु भगत – – एक वो बलिदानी जिसने खुद के साथ

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10 फरवरी- बलिदान दिवस क्रांतिवीर सोहनलाल पाठक.. जब कहीं चल रहा था चरखा तब हांगकांग, मनीला, अमेरिका से ला रहे थे हथियार और बर्मा में झूल गये फांसी

कभी एक दौर था जिसको गुलामी कहा जाता था, उस समय इंसानों को दास बना कर रखने की प्रथा थी

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9 फरवरी- अत्याचारी अंग्रेज अफसर रेंड का वध कर के आज ही फांसी पर झूल गये थे क्रांतिवीर बालकृष्ण चाफेकर.

जानते है वीर बहादुर बालकृष्ण चापेकर और उनके भाइयों के जीवनकाल का इतिहास. चापेकर बंधु दामोदर हरि चापेकर, बालकृष्ण हरि

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