रघुराम राजन ने अब जो बयान दिया बैंक के भगोड़े के खिलाफ,, उसे सुन कांग्रेस हुई स्तब्ध.. भाजपा हुई मगन

बैंकों से कर्जा लेकर भागने वाले विजय माल्या, नीरव मोदी को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर रहने वाली कांग्रेस पार्टी पर RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का ये बयान वज्र की तरह गिरेगा तथा सामने आयेगी वो हकीकत जिसे कांग्रेस मोदी सरकार पर आरोप लगाकर छिपाने की कोशिश करती है. देश में बढे NPA को लेकर भारतीय रिजर्ब बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि बैंकों के इस NPA की बढ़ने की जिम्मेदार कांग्रेस के नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह की UPA की सरकार है. रघुराम राजन के इस बयान से जहाँ कांग्रेस पार्टी भौचक्की है वहीं भाजपा के लिए ये बयान किसी संजीवनी से कम नहीं है.

रघुराम राजन के मुताबिक, बैंकर्स के अलावा आर्थिक मंदी के साथ फैसले लेने में सरकार की लापरवाही भी जिम्मेदार रही. साथ ही NPA में जो बढ़ोतरी हुई है, उसके लिए पूर्व UPA सरकार में हुए घोटाले भी बड़ी वजह है. रघुराम राजन ने संसदीय समिति को दिए जवाब में कहा कि सबसे ज्यादा एनपीए यूपीए सरकार के कार्यकाल 2006-2008 के बीच रहा. घुराम राजन ने कहा कि UPA कार्यकाल में कोलगेट जैसे घोटाले भी बाहर आए जिससे सरकार की निर्णय लेने की प्रक्रिया धीमी हुई और कई इंफ्रा प्रोजेक्ट्स पर खराब असर पड़ा और इससे फंसे हुए कर्ज में बढ़ोतरी होने लगी. संसदीय समिति की एस्टिमेट कमिटी के चेयरमैन मुरली मनोहर जोशी को रघुराम राजन ने अपना नोट भेजा है. उन्होंने लिखा है कि कोयला खदानों के संदिग्ध आवंटन और जांच के डर जैसी समस्याओं की वजह से यूपीए सरकार ने फैसले लेने में देरी की. यही वजह रही कि कर्जदारों के लिए कर्ज चुकाना मुश्किल होता गया. रघुराम राजन ने कहा कि बैंकों ने भी अति आशावादी रवैया अपनाते हुए बड़े लोन देने में सावधानी नहीं बरती, इसके बाद जब बैंकों के कर्ज फंसने लगे तो भी उन्होंने समय रहते कदम नहीं उठाए. उन्होंने यह भी कहा कि वह नहीं जानते की बैंकों ने ऐसा किस वजह से किया.

रघुराम राजन ने कहा, ‘इस दौरान बैंकों ने गलतियां की. उन्होंने पूर्व के विकास और भविष्य के प्रदर्शन को गलत आंका. वे प्रोजेक्ट्स में अधिक हिस्सा लेना चाहते थे. वास्तव में कई बार प्रमोटर्स के निवेश बैंकों के प्रोजेक्ट्स रिपोर्ट के आधार पर ही बिना उचित जांच-पड़ताल किए साइन कर दिया.’ राजन ने अपने नोट में कहा है कि NPA की समस्या में गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार दोनों शामिल है. उन्होंने कहा कि बैंकर्स ओवरकॉन्फिडेंस में थे और लोन देने से पहले बहुत कम जांच-पड़ताल की. यही वजह रही कि डूबते कर्ज पर भी कभी ध्यान नहीं दिया गया. साथ ही बिना सोचे प्रोजेक्ट्स के लिए लोन बांटे गए. एक उदाहरण देते हुए राजन ने कहा कि एक प्रोमोटर ने उन्हें बताया था कि कैसे बैंकों ने उनके सामने चेकबुक लहराते हुए कहा था कि जितनी चाहो राशि भर लो. रघुराम राजन ने कहा कि घोटाले होते रहे और UPA सरकार NPA को लेकर कोई कदम नहीं उठा सकी और उसका परिणाम आज सामने है. बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल अक्सर NPA को लेकर मोदी सरकार पर हमलावर रहते हैं लेकिन अब रघुराम राजन के बयान ने भाजपा को ब्रह्मास्त्र दे दिया है तथा अब कांग्रेस की मुश्किलें एक बार पुनः बढ़ने वाली हैं.

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