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नितिन गडकरी का प्रयास और माँ गंगा का आशीर्वाद. डाबर ने रेल मार्ग के बजाय जलमार्ग से काशी से कोलकाता भेजा उत्पाद.. बोले – “सुगम और सस्ता है ये”

आज़ादी को मिले काफी समय हो गये थे लेकिन या तो सामर्थ्य की कमी या दूरदर्शिता का अभाव था जो नितिन गडकरी जी के चलते मूर्त रूप में साकार हुआ . पहले पेप्सी ने अपना तमाम उत्पाद गंगा के मार्ग से भेजा था और अब नामी कम्पनी डाबर भी मुरीद हुई है गडकरी जी के प्रयासों की और उसने दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले तमाम रोजमर्रा के सामान वाराणसी से कोलकाता सफलता पूर्वक भेजा है और साथ में सरकार के इस कदम को धन्यवाद देते हुए ये भी कहा है कि रेलमार्ग या हवाई मार्ग के बजाय जल मार्ग से सामान भेजना सुगम ही नहीं बल्कि बचत के लिए भी उपयुक्त है .

विदित हो कि भारत की नामी और अतिचर्चित कम्पनियों में से एक रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान बनाने वाली कंपनी डाबर ने गत वृहस्पतिवार को को कहा कि उसने राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 से अपने माल की पहली खेप काशी से महानगर कोलकाता के लिए भेजी है. गडकरी जी के अथक प्रयासों के बाद मोदी सरकार ने अभी गत सोमवार को मोदी , योगी और गडकरी की मौजूदगी में वाराणसी में गंगा नदी पर विकसित इस जल मार्ग को देश को समर्पित किया था. आरंभिक चरण में इस नव मार्ग पर 2000 टन के जहाजों का आवागमन आसानी से हो सकेगा.

इस मामले पर डाबर इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (परिचालन विभाग) ने मीडिया को बताया है कि  “हम इस परियोजना का हिस्सा बनकर उत्साहित हैं. इससे न सिर्फ लागत में कमी आयेगी बल्कि माल भी जल्दी पहुंचेगा.  उत्पाद भेजने वाली कम्पनी का ये दावा है कि वह अंतर्देशीय जलमार्ग से वाणिज्यिक माल भेजने वाली पहली एफएमजीसी (रोजमर्रा के उपभक्ता सामान बनाने वाली) कंपनी है. इस मार्ग पर माल की पहली खेप पेप्सिको इंडिया ने भेजी थी. पेप्सी के कंटेनर में लदे माल को कोलकाता से लेकर जहाज 12 नवंबर को ही वाराणसी में बने मल्टी मॉडल टर्मिनल पर पहुंचा था. डाबर इंडिया ने कहा है कि वाराणसी में पोत पर चढ़ाए गए उसके कंटेनर में फलों के रस से तैयार पेय पदार्थ भरे हैं.

 

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