कम्पनी के अधिकारी ने कहा – ‘अभी काम बहुत ज्यादा है, नमाज़ थोड़ी देर बाद पढ़ लेना”.. उसके बाद आफत आ गयी उस कम्पनी पर

ये घटना अमेरिका की है . यहाँ पर एक कम्पनी जिसने अपने मुस्लिम कर्मचरियों से काम का बोझ ज्यादा होने के नाते नमाज़ बाद में पढने का आग्रह किया था अब वही आ चुकी है भारी संकट में .. ये मामला पहले तो तमाम इस्लामिक मुल्कों ने मुसलमानों के मानवाधिकार हनन के रूप में उठाया और उसके बाद इतने से ही मन नही भरा तो उस कम्पनी को खींच लिया गया अदालत जहाँ भारी विरोध और दबाव के बाद आखिरकार अदालत ने कम्पनी के खिलाफ दिया अपना फैसला .

विदित हो कि अमेरिका की मुख्य प्रमुखता वाली खबरों में से एक ये भी रही कि एक संघीय विरोधी भेदभाव एजेंसी ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका की बड़ी मीट पैकर कंपनी ने 138 सोमाली-अमेरिकी मुस्लिम श्रमिकों को $ 1.5 मिलियन का भुगतान करेगी। ये कम्पनी अचानक ही विश्व स्तर पर चर्चा में तब आ गयी जब इसने काम का बोझ ज्यादा होने के नाते अपने मुस्लिम कर्मचारियों से नमाज़ बाद में पढने का आग्रह किया जिसको उन्होंने ठुकरा कर पहले तो नौकरी छोड़ दी और बाद में उसी पर खुद को निकाले जाने का आरोप लगाते हुए उसको अदालत में खींच लिया .. इस बीच तमाम इस्लामिक मुल्क इसको मुसलमानों के मानवाधिकार का हनन बता कर विवाद खड़ा कर चुके थे .

बाद में इन्होने अदालत में आरोप लगाते हुए कहा कि नमाज़ का समय मांगने से मना करते हुए कम्पनी ने इनको नौकरी से निकाल दिया . कम्पनी मुस्लिमो की संख्या ज्यादा होने के नाते खुद को सही साबित नहीं कर पाई और आख़िरकार उसको मुकदमा हार जाना पड़ा . द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिकी समान रोजगार अवसर आयोग ने कहा कि मिनेसोटा स्थित कृषि व्यवसाय कंपनी कारगिल कॉर्प का एक प्रभाग, कारगिल मीट सॉल्यूशंस, फोर्ट मॉर्गन बीफ प्रसंस्करण संयंत्र में मुस्लिम को नमाज़ के वक़्त ब्रेक देने पर भी सहमत हो गया है। संघीय एजेंसी ने कहा कि मीट कंपनी ने गलत काम करने से इनकार करता है लेकिन आगे मुकदमेबाजी से बचने के लिए वह मुस्लिम कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए तैयार हो गया।

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